बाइबल के वचन
बाइबल हमें उद्धार पाने में बुद्धिमान बनाती है(2तीम 3:15)। आइए हम इससे परमेश्वर की सच्ची इच्छा सीखें।
यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?
परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…
दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?
यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…
फसह
यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…
झूठे भविष्यद्वक्ता की पहचान और सच्चा चर्च
जिस पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र में हम रहते हैं, वह इतने नाजुक और उत्कृष्ट रूप से व्यवस्थित किया गया है कि हम असहाय होकर सोचते हैं कि किसी न किसी ने तो इसका निर्माण किया है। क्या होता यदि पृथ्वी वर्तमान आकार से थोड़ी बड़ी या छोटी होती? क्या होता यदि पृथ्वी सूरज से थोड़ा करीब या दूर होती? यदि पृथ्वी का आकार या सूरज तक की दूरी में थोड़ा सा भी परिवर्तन हो जाए और यदि उपग्रह चांद का अस्तित्व न होता, तो पृथ्वी पर जीवन न होता। पृथ्वी को पानी या ऑक्सीजन की कमी होती और इसका तापमान अधिक हद तक गर्म या ठंड होता; तो जैसा अब है वैसा ही पृथ्वी का पर्यावरण मानव निवास के लिए…
वे जो क्षणभर के लिए जीते हैं और वे जो अनन्तकाल के लिए जीते हैं
बाइबल गवाही देती है कि परमेश्वर की सन्तान, जो उद्धार पाएंगी, वे स्वर्ग के नागरिक हैं।(फिलि 3:20) स्वर्गीय नागरिक होने के तौर पर, हमें अपना मन पृथ्वी की नहीं पर स्वर्ग की बातों पर लगाना चाहिए। परमेश्वर हमें, अपनी सन्तानों को, सिर्फ हमारे शारीरिक जीवन में नहीं फंसाना चाहते। इसलिए परमेश्वर हमें सिखाते हैं कि हमें उन अनन्त चीजों के लिए जीना चाहिए जो हम स्वर्ग में वापस जाकर भोगेंगे। जिस प्रकार इस पृथ्वी पर सब के पास एक देश के नागरिक होने के नाते कुछ अधिकार और कर्तव्य होते हैं, उसी प्रकार हम सभी के पास स्वर्ग के नागरिक होने के नाते कुछ अधिकार और कर्तव्य होते हैं। आइए हम देखें कि पृथ्वी पर हमारा जीवन हमारे लिए क्या…
प्रायश्चित्त के दिन का अर्थ
सब्त और तीन बार में सात पर्व इत्यादि परमेश्वर के पर्व, जिनका वर्णन बाइबल में है, वे सिर्फ पुराने नियम की व्यवस्था नहीं हैं, लेकिन उनमें से हर एक के पास मानवजाति के उद्धार के लिए महान अर्थ है। परमेश्वर सिय्योन के लोगों को बचाते हैं जो पर्व मनाते हैं और जिन्होंने पर्वों के अनुसार बलिदान(आराधना) चढ़ाकर परमेश्वर से वाचा बांधी है, उन्हें “मेरे भक्त” कहकर बुलाते हैं(यश 33:20-24; भज 50:1-5)। परमेश्वर यह भी कहते हैं कि वह अपनी संतानों को इकट्ठा करेंगे जो अंतिम दिनों में पर्व मनाने के लिए प्रयास करती हैं, और पृथ्वी के सभी लोगों में उनकी कीर्ति और प्रशंसा फैलाएंगे(सपन 3:14-20)। बाइबल में परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के अनुसार, लोग जो परमेश्वर के नियत पर्वों सहित…
मेरी खोज करो
परमेश्वर ने मानव जाति से कहा, “मेरी खोज करो।” परमेश्वर की खोज करने के लिए, हमें उनका ज्ञान रखना चाहिए। बाइबल में दिए गए सारे संकेतों के द्वारा हमें यह जानना चाहिए कि परमेश्वर कहां निवास करते हैं और यह कि जब परमेश्वर इस पृथ्वी पर आएंगे तो क्या ले आएंगे। केवल तब ही हम परमेश्वर को खोजकर सही तरह से ग्रहण कर सकेंगे। परमेश्वर इस पृथ्वी पर आ चुके हैं, लेकिन अब तक भी दुनिया में बहुत से चर्च परमेश्वर को न तो जानते और न ही उनकी खोज करते। यदि बाइबल कहती है कि परमेश्वर सिय्योन में निवास करते हैं, तो हमें जानना चाहिए कि सिय्योन किसे संकेत करता है, और यदि बाइबल कहती है कि परमेश्वर सिय्योन…
चर्च ऑफ गॉड वर्ल्ड मिशन सोसाइटी दुनिया भर के सभी लोगों को आशा देता है
जो मुकुट पहनना चाहता है उसे उस मुकुट का भार उठाना चाहिए
स्वर्ग का राज्य जो परमेश्वर ने अपनी संतानों के लिए तैयार किया है, किसी आंख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और न ही किसी के चित में चढ़ा है। लेकिन, स्वर्ग जाने का मार्ग समतल नहीं है। अगर हम स्वर्ग बिना किसी कठिनाई के आसानी से जा सकते तो अच्छा होता। लेकिन, इस मार्ग पर हमें रोकने वाली बड़ी रुकावटें हैं और ऐसी बाधाएं भी हैं जो हमारे काबू से बहार हैं। प्रेरितों सहित जिन्होंने मसीह की आज्ञा के प्रति आज्ञाकारी होकर सुसमाचार प्रचार किया था, प्रथम चर्च के संतों के साथ भी ऐसा ही था। वे कठिनाई और उत्पीड़न में भी विश्वास के मार्ग पर चले, वह समतल अर्थात् सरल मार्ग नहीं था। परमेश्वर ने अपनी…
फसह वह सत्य है जो जीवन बचाता है
पृथ्वी दुनिया में लोगों के लिए विशाल लग सकती है, लेकिन यह ब्रह्मांड की विशालता में बस एक छोटी सी बिंदु है। बाइबल हमें बताती है कि यह पृथ्वी डोल में की एक बूंद या पलड़ों पर की धूल के तुल्य ठहरी(यश 40:15)। परमेश्वर ने हम, मनुष्यों के लिए, जो इस छोटी पृथ्वी पर रहते हैं, एक वाचा स्थापित की है। सभी व्यवस्था, नियम और आज्ञाओं में, जो महान ब्रह्मांड का प्रबंधन करने वाले परमेश्वर द्वारा दिए गए हैं, परमेश्वर की ऐसी इच्छा शामिल है कि वह हमें स्वर्ग में सर्वदा अनंत जीवन और आनंद भोगने देंगे। परमेश्वर ने नई वाचा का फसह पुन:स्थापित किया है और हमें इस युग में इसे मनाने की अनुमति दी है। यह भी परमेश्वर…
विश्व सुसमाचार प्रचार और हमारा मिशन
सिय्योन में हमारे भाई और बहनें सभी सात अरब लोगों को बचाने की इच्छा के साथ सुसमाचार प्रचार करने में अपना पूरा मन लगा रहे हैं। जैसे स्वर्गीय पिता ने भविष्यवाणी की थी, हमारे खोए हुए स्वर्गीय परिवार के सदस्यों को ढूंढ़ने के उद्धार का कार्य दुनिया में कोलाहल मचा रहा है और सुसमाचार जो सप्ताह भर का प्रकाश की तरह तेजी से फैल रहा है, पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित करता है। इस समय, आइए हम विश्व सुसमाचार प्रचार के बारे में बाइबल की भविष्यवाणियां और परमेश्वर द्वारा हमें सौंपे गए मिशन को एक बार फिर अपने मन में अंकित करें। सुसमाचार जो पूरी दुनिया में फैल रहा है बाइबल की भविष्यवाणियों के अनुसार परमेश्वर का सुसमाचार पूरी दुनिया में…
मैं तुझे देता हूं
परमेश्वर ने हम से कहा, “सदा आनन्दित रहो, निरंतर प्रार्थना में लगे रहो, और हर बात में धन्यवाद करो”(1थिस 5:16-18)। “हर बात में धन्यवाद करो।” इसका अर्थ है कि हमें हमेशा आभारी रहना चाहिए चाहे परिस्थिति कैसी भी हो - अच्छी या बुरी, आसान या मुश्किल। जब परमेश्वर हम से हर बात में धन्यवाद करने को कहते हैं, तो धन्यवादी होने का कारण होना चाहिए। हम हमेशा परमेश्वर से प्रचुर प्रेम पा रहे हैं। वास्तव में, हमारी बुद्धि और प्रतिभा से लेकर परमेश्वर के प्रति हमारे विश्वास तक सब कुछ जो हमारे पास है, परमेश्वर से है। सिय्योन के लोगों के रूप में, हमें अपने भविष्य के लिए सब कुछ प्रदान करने के लिए हर दिन परमेश्वर को धन्यवाद और…
भले काम करें
परमेश्वर अपने लोगों को “संसार की ज्योति और नमक” कहते हैं। संसार की ज्योति और नमक बनने के लिए हमें परमेश्वर की दृष्टि में भले काम करना और अच्छा मन रखना चाहिए। बाइबल हमसे कहती है कि इस संसार के सदृश्य न बनो(रोम 12:2), और हमें स्वर्ग की संतान के रूप में भले काम करना सिखाती है। वे भी जो परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते अक्सर कहते हैं, “यदि आप भले काम करें तो स्वर्ग जाएंगे और यदि आप बुरे काम करें तो नरक जाएंगे।” हम सभी को याद रखना चाहिए कि हमारे विश्वास के साथ ही हमारे भले काम भी एक महत्वपूर्ण कारक बनेगा जो तय करता है कि हम स्वर्ग जाएंगे या नरक। संत जो परमेश्वर की महिमा…
बुरी आदतें और अच्छी आदतें
लोग कहते हैं कि आदत एक दूसरा स्वभाव है। सभी के पास अपना–अपना विशिष्ट स्वभाव है और उसका उन पर भारी प्रभाव होता है क्योंकि उसके बार–बार दोहराए जाने से वह उनकी आदत बन जाती है। हम सभी के पास अच्छी और बुरी आदतें हैं। अच्छी आदतें हमारे विश्वास के जीवन के लिए उपयोगी हैं, लेकिन बुरी आदतें सुसमाचार के कार्य के लिए बाधाएं हैं। इसलिए परमेश्वर ने हमें सिखाया है कि हमें अपनी बुरी आदतों को छोड़कर उन्हें अच्छी आदतों में बदलना चाहिए ताकि हम फिर से जन्म लेकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकें। बाइबल के द्वारा, आइए हम अच्छी और बुरी आदतों के बारे में सोचें और फिर से जन्म लेने के लिए अपनी सभी बुरी…
परमेश्वर का बचानेवाला प्रेम
परमेश्वर प्रेम हैं(1यूह 4:8)। वह पूरे अंतरिक्ष का संचालन करते और शासन करते हैं, और वह असंख्य स्वर्गदूतों से आदर और महिमा पाने के योग्य हैं। लेकिन वह स्वर्ग की महिमा पीछे छोड़कर अपनी संतानों को बचाने के लिए इस छोटी सी पृथ्वी पर आए। वह पापियों के समान शरीर में आए और उन्होंने पापियों के द्वारा हर प्रकार की निन्दा और अपमान को सहन किया। वह सिर्फ अपनी संतानों के उद्धार की आशा रखते हुए बलिदान के मार्ग पर चले। इसलिए बाइबल कहती है कि परमेश्वर प्रेम हैं। परमेश्वर के महान प्रेम ने हमें वह बनाया है जो आज हम हैं, इस तथ्य को फिर से सोचते हुए, आइए हम पिता और माता जो अपनी संतानों को बचाने के…
विश्वास का तेल
स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लिए हमें विश्वास की निश्चित ही आवश्यकता है। जैसे बाइबल कहती है, “विश्वास के बिना परमेश्वर को प्रसन्न करना अनहोना है(इब्र 11:6),” विश्वास एक आवश्यक तत्व है जो स्वर्ग के राज्य में जाने के लिए हमारे पास होना चाहिए। तब, यह जानने का तरीका क्या है कि हमारे पास कितना विश्वास है? जब हम बीमार होते हैं, तब हमारा शरीर लक्षण दिखाता है। उसी तरह, जब हम अपने हृदयों को विश्वास से भरने में नाकाम हों, तब हम आत्मिक बीमारी के बहुत से लक्षण दिखाएंगे; हम हमेशा कुड़कुड़ाते और शिकायत करते हैं, परमेश्वर के वचनों पर संदेह करते हैं और परमेश्वर की शक्ति पर विश्वास नहीं करते। ऐसे गलत विचारों और व्यवहारों की…
हमें परमेश्वर को क्या देना चाहिए?
संसार में जीते हुए हमारे पास कुछ विशेष दिन होते हैं, जैसे कि जन्मदिवस, एडमिशन और गे्रजुएशन दिवस, शादी की सालगिरह इत्यादि। इन दिनों का परिवार के सदस्यों के लिए खास अर्थ होता है। इसलिए जब परिवार के सदस्यों में से एक सदस्य के पास कोई एक विशेष दिन होता है, तो परिवार के बाकी सदस्य यह सोचते हुए उत्सुक होते हैं कि उसके लिए क्या उपहार तैयार करें। फिर, जब हम अपने आत्मिक घर स्वर्ग वापस जाएं, तब हमें अपने आत्मिक माता–पिता, यानी पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर को क्या देना चाहिए? परमेश्वर के लिए सबसे मनपसंद उपहार क्या है? हमने परमेश्वर की संतानों के रूप में अब तक सिर्फ परमेश्वर से पाया है; जीवन, प्रेम और बाकी सब…
पवित्रशास्त्र में लिखा है कि ऐसा ही होना अवश्य है
आज दुनिया में बहुत से चर्च हैं, और उनमें से हर एक दावा करता है कि उसके पास सच्चा विश्वास है। लेकिन किसी के विश्वास का मानक परमेश्वर का वचन है। वह कभी मनुष्य का विचार नहीं हो सकता। जब हम बाइबल के वचनों को अपने विश्वास का केंद्र बनाएंगे, तब हम विश्वास के सही मार्ग पर जाकर अनन्त स्वर्ग के राज्य की ओर चल सकते हैं। बाइबल में परमेश्वर की भविष्यवाणियां हैं, जो दिखाती हैं कि भविष्य में क्या होगा। इसलिए ध्यान से बाइबल का अध्ययन करके, हम विश्वास का सही मार्ग खोज सकते हैं। अब, आइए हम बाइबल के द्वारा इस बात की पुष्टि करें कि परमेश्वर ने अपनी उन संतानों के लिए उद्धार की प्रतिज्ञा की है…
लोग जो आशीषें पहुंचाते हैं
सर्वशक्तिमान परमेश्वर सभी मनुष्यों के जीवन, मृत्यु, सौभाग्य और दुर्भाग्य का नियंत्रण करते हैं। वह उन्हें जो उनके वचनों को मानते हैं, आशीष देते हैं और जो नहीं मानते, उन्हें दण्ड देते हैं। आशीषों की प्रतिज्ञा उन्हें दी जाती है जो परमेश्वर को अपना खजाना मानते हैं और उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं(व्य 30:15–16; अय 22:21–28)। इसलिए आइए हम स्वर्ग की संतानों के रूप में दृढ़ता से विश्वास करें कि जैसी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हमसे की है, उसी प्रकार सब कुछ सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा, और आइए हम स्वर्ग के राज्य में बलपूर्वक प्रवेश करने का प्रयास करें ताकि हम उन सभी आशीषों को पा सकें जो परमेश्वर हमें देंगे। चूंकि हम सिय्योन के लोगों के रूप में दूसरों…
ज्योति और अंधकार
समय बिना रुके चलता रहता है जब हम सोते हैं, काम करते हैं, आराम लेते हैं और खाते हैं; चाहे हम कुछ भी करें, समय बीतता जाता है। चूंकि हम समय को बहता हुआ नहीं देख सकते, इसलिए हमने एक उपकरण का आविष्कार किया है, जिससे हम दिखाई न देने वाले समय को देख सकते हैं। वह घड़ी है। आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। चूंकि हम दिखाई देनेवाली शारीरिक दुनिया में रहते हैं, इसलिए हम आत्मिक दुनिया की चीजों को देख या महसूस नहीं कर सकते। जैसे दिखाई न देने वाले समय के बहाव को मापने और देखने के लिए एक घड़ी बनाई गई, ठीक वैसे ही हमें उस आत्मिक दुनिया को दिखाने के लिए जिसे हम देख…
कर्म सहित विश्वास
बाइबल कहती है कि राज्य का सुसमाचार इस संसार में रहनेवाले सभी जातियों के लोगों को प्रचार किया जाएगा(मत 24:14)। और वह यह भी स्पष्ट रूप से गवाही देती है कि सुसमाचार के स्वर सारी पृथ्वी पर, और उसके वचन जगत की छोर तक पहुंचेंगे(रो 10:18)। अब दुनिया के कोने–कोने से यह सिय्योन की सुगंध पहुंच रही है कि भविष्यवाणी के वचनों को सुनकर हमारे भाई और बहनें जागृत हुए हैं और वे दुनिया भर में सभी जातियों के लोगों को निडरता से परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार कर रहे हैं। लेकिन अब भी कुछ सदस्य हैं जो सुसमाचार के प्रचार में भाग लेने में हिचकिचाते हैं। बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार आज सभी 7 अरब लोगों को सुसमाचार का…
स्वर्ग के शब्द और उद्धार के शब्द
आज सिय्योन के सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और भविष्यवाणी के अनुसार बड़ी भीड़ इकट्ठी होकर आ रही है। इसलिए उनमें से कुछ ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने सिय्योन में शिष्टता से बोलना नहीं सीखा है और बाइबल की शिक्षाओं को नहीं समझा है, और इसलिए वे संसार के द्वारा सीखे गए रीति–रिवाज के अनुसार बोलना जारी रखते हैं। नया वर्ष 2016 आरम्भ होने से पहले आइए हम यह सोचने का समय लें कि हम कैसे स्वर्ग के शब्द और उद्धार के शब्द बोल सकते हैं। “आनन्द” शब्द बोलने की आदत डालने से स्वर्ग का आनन्द फैल जाता है कुछ समय पहले मुझे एक सदस्य का ईमेल पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि उसके चर्च का पुरोहित–कर्मचारी और उसकी…
स्वर्गीय मूल्य और स्वर्गीय गणना–पद्धति
दुनिया में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का मूल्य गिनने का अपना मानक और तरीका होता है। कुछ लोग भौतिक चीजों या धन–दौलत को ज्यादा मूल्य देते हैं, कुछ लोग ज्ञान को ज्यादा मूल्य देते हैं, और कुछ लोग मनोरंजन या शौक को ज्यादा मूल्य देते हैं। दुनिया के लोगों के विपरीत, हम अदृश्य और अनन्त चीजों की आशा करते हैं। चूंकि हम “स्वर्ग के नागरिक” हैं, इसलिए हमें ‘लोग इसके बारे में क्या सोचेंगे?’ सोचने के बजाय ऐसा सोचना चाहिए कि, ‘परमेश्वर इसके बारे में क्या सोचेंगे?’ इस तरह हमें स्वर्गीय मानकों को प्राथमिकता देने की जरूरत है(2कुर 4:18; फिलि 3:20)। स्वर्गीय मानकों के अनुसार, हम सभी मूल्यवान हैं। सड़क के किनारे लुढ़कने वाले एक पत्थर के टुकड़े का भी…