यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

​झूठा दोष

1.कसदियों ने दानिय्येल के तीन साथियों पर दोष लगाया बेबीलोन के राजा, नबूकदनेस्सर ने घोषणा की कि जो मुंह के बल गिरकर सोने की मूर्ति को दण्डवत् न करेगा वह उसी घड़ी धधकते हुए भट्ठे में डाल दिया जाएगा। इसके बावजूद, दानिय्येल के तीन साथी, शद्रक, मेशक और अबेदनगो ने सोने की मूर्ति को दण्डवत् नहीं किया। उस समय, कुछ कसदियों ने जो उनसे ईर्ष्या करते थे, यह देखकर उन पर दोष लगाया और राजा को उन्हें दण्ड देने के लिए कहा। उसी समय कई एक पुरुष राजा के पास गए, और कपट से यहूदियों की चुगली खाई(दोष लगाने लगे, आइबीपी बाइबल)। दान 3:8 ※ कसदी दक्षिण बेबीलोन के एक क्षेत्र का नाम था। जब से कसदियों ने बेबीलोन पर…

एक ही बात आवश्यक है

मार्था नामक एक स्त्री ने यीशु को अपने घर में आमंत्रित किया। यीशु वचन सिखाने लगे, तब मार्था की बहन मरियम प्रभु के चरणों में बैठ​कर, जो कुछ वह कह रहे थे उसे सुन रही थी। मार्था को उनकी सेवा करने के लिए बहुत कुछ तैयारी करनी थी, और उसका मन व्यस्त हो गया। इसलिए वह यीशु के पास आकर कहने लगी। “हे प्रभु, क्या आपको कुछ भी चिन्ता नहीं कि मेरी बहन ने मुझे सेवा करने के लिए अकेली ही छोड़ दिया है? उससे कह दीजिए कि वह मेरी सहायता करे।” तब यीशु ने कहा। “हे मार्था, तू बहुत सी बातों के लिए चिंतित और व्याकुल रहती है। लेकिन बस एक ही बात आवश्यक है। मरियम ने उसी उत्तम…

जैसा बाप, वैसा बेटा

1920 में, एक महिला ने दावा किया कि वह रूस की आखिरी राजकुमारी अनास्तासिया थी। यह बोल्शेविक क्रांति के दौरान रूस के शाही परिवार की निर्दयतापूर्वक हत्या के दो साल बाद था। अनास्तासिया रूस के अंतिम सम्राट निकोलस द्वितीय की चौथी संतान थी, जो चार राजकुमारियों में सबसे अधिक प्रेम पाती थी। उसके प्रकट होने पर, रूसी शाही परिवार की शोकपूर्ण घटना के लिए सहानुभूति के साथ जनता का ध्यान आकर्षित किया गया। उस महिला का नाम एना एंडरसन था। वह विवादों के केंद्र में आ गई; वह शाही परिवार के बारे में अच्छी तरह से जानती थी और शाही परिवार के शिष्टाचार से परिचित थी, और उसके आसपास के लोगों ने उसके बारे में गवाहियां दीं। 1970 में, सत्य…

मसीह आन सांग होंग का आगमन

2,000 वर्ष पहले, मानवजाति को बचाने के लिए यीशु का जन्म इस पृथ्वी पर हुआ था। 30 वर्ष की आयु में उनका बपतिस्मा हुआ था, और उन्होंने लगभग साढ़े तीन सालों की अपनी सेवकाई के दौरान नई वाचा के सुसमाचार का प्रचार किया। अपने मिशन को पूरा करने के बाद, वह स्वर्ग को चले गए। जब मसीह स्वर्ग को चले गए, तब उन्होंने इस पृथ्वी पर वापस आने की प्रतिज्ञा की(प्रे 1:6–11)। वर्ष 2018 मसीह आन सांग होंग जो बाइबल की भविष्यवाणियों के अनुसार दूसरी बार आए यीशु हैं, उनके जन्मदिवस की 100वीं सालगिरह का अर्थपूर्ण वर्ष है। आइए हम बाइबल के द्वारा खोजें कि क्यों परमेश्वर इस पृथ्वी पर आए। अंधेरी दुनिया जहां सत्य अस्पष्ट है यीशु के स्वर्गारोहण…

क्यों चर्च ऑफ गॉड सच्चा चर्च है?

दुनिया में कई अलग–अलग प्रकार के चर्च और ईसाई संप्रदाय हैं, लेकिन सच्चे चर्च को खोजना कठिन है जो प्रथम चर्च के नमूने के अनुसार मसीह की शिक्षाओं का पालन करता है। लेकिन, बहुत से ईसाई यह नहीं जानते; वे विश्वास करते हैं कि अपना चर्च सच्चा है और वहां बिना शर्त के उद्धार दिया जाता है। वह चर्च ऑफ गॉड है जिसे यीशु ने स्थापित किया और जहां प्रेरित जाते थे। चर्च ऑफ गॉड, जिसमें आज हम उपस्थित होते हैं, एकमात्र सच्चा चर्च है जिसे परमेश्वर ने पिता के युग और पुत्र के युग से गुजरकर इस पवित्र आत्मा के युग में मानवजाति को बचाने के लिए स्थापित किया। आइए हम बाइबल की भविष्यवाणियों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के द्वारा…

परमेश्वर हमें देखते हैं

बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार परमेश्वर का वचन दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है। चूंकि सत्य इतनी जल्दी से प्रचार किया जा रहा है, तो ज्यादा से ज्यादा लोग सिय्योन में इकट्ठा हो रहे हैं। इसलिए, अब भी कुछ सदस्य हैं जिनके पास ऐसी आदतें होती हैं जो उन्होंने संसार से सीखी थीं। चूंकि हमने सत्य को ग्रहण किया, हम परमेश्वर में खुदको थोड़ा थोड़ा करके संसार की गंदगी को साफ कर रहे हैं, इसलिए हम ईमानदार व्यक्तित्व और व्यवहार के साथ संपूर्ण जीव में बदल सकते हैं जो परमेश्वर चाहते हैं। बाइबल के द्वारा, आइए हम परमेश्वर की उत्सुक इच्छा को जांचें जो अपनी संतान को पूरी तरह फिर से जन्म लेना चाहते हैं। परमेश्वर हर एक…

हमारी आत्मा का उद्धार, अनन्त जीवन को खोजो

बाइबल हमें कहती है कि हमारे विश्वास का प्रतिफल हमारी आत्माओं का उद्धार है(1पत 1:8)। यदि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हुए भी उद्धार पाने में नाकाम रहें, तो हमारा विश्वास व्यर्थ है और हम किसी और की तुलना में अधिक दयनीय होंगे। बाइबल कहती है कि एकमात्र जगह जहां उद्धार न पानेवाले लोग जाएंगे, वह नरक है—अनन्त यातना की जगह। इसलिए, हमें अपने उद्धार के मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है। सबसे ऊपर, हमें परमेश्वर के बारे में जानने की जरूरत है जो हमारी आत्माओं को बचाते हैं। 2,000 वर्ष पहले, बहुत से लोग परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा करते थे, लेकिन वे परमेश्वर को नहीं जानते थे। यह इसलिए क्योंकि परमेश्वर जो बाइबल की भविष्यवाणी…

स्वर्गीय माता ने हमारा भाग्य बदला है

सुसमाचार अब तेजी से दुनिया भर में फैलाया जा रहा है। जैसे बाइबल में भविष्यवाणी की गई है, खोए हुए स्वर्गीय परिवार के सदस्यों को खोजने का उद्धार का कार्य दुनिया में कोलाहल मचा रहा है, और जहां कहीं हमारे भाई–बहनें जाते हैं, वहां परमेश्वर सिय्योन स्थापित करते हैं। मैं विश्वास करता हूं कि यह सब परिणाम इसलिए आया है क्योंकि सिय्योन के सदस्यों ने पूरे जोश के साथ एक होकर मिलजुलकर सुसमाचार का काम किया है। उज्ज्वल भविष्य हमारा इंतजार कर रहा है। परमेश्वर का वचन यह पक्का वादा करता है कि जब यरूशलेम माता की महिमा फैल जाएगी, तब सब जातियों के लोग परमेश्वर के पास लौटेंगे और परमेश्वर के लोग अनन्त स्वर्ग के राज्य में युगानुयुग राज्य…

तेरा विश्वास बड़ा है

जब यीशु सूर और सैदा के प्रदेश में आया, एक अन्यजाति स्त्री यीशु के पांवों के पास गिरी और ऊंची आवाज से चिल्लाकर कहा। “हे प्रभु! दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया कीजिए! मेरी बेटी को दुष्टात्मा बहुत सता रहा है। दुष्टात्मा को बाहर निकाल दीजिए।” यीशु ने उससे एक शब्द भी नहीं कहा। जब चेलों ने आकर उनसे स्त्री को विदा करने के लिए विनती की, तब यीशु ने अपना मुंह खोला और जवाब दिया। “मैं केवल इस्राएल के लोगों के लिए जो खोई हुई भेड़ों के समान हैं, भेजा गया।” तब उस स्त्री ने फिर से यीशु के सामने झुककर विनती की। लेकिन, यीशु ने दृढ़ता से कहा। “लड़कों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना उचित नहीं।”…

मैं तुझे भेजता हूं कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए।

यह तब हुआ जब मूसा जो भेड़-बकरियों को चराता था, होरेब पर्वत के पास गया। मूसा ने एक कटीली झाड़ी को जलते हुए देखा जो भस्म नहीं हो रही थी, और वह उसके निकट गया। तब परमेश्वर ने कहा, “मैं तेरे पिता का परमेश्वर - अब्राहम, इसहाक और याकूब का परमेश्वर हूं। मैंने अपनी प्रजा के लोग जो मिस्र में हैं, उनके दु:ख को निश्चय देखा है; और उनकी चिल्लाहट को सुना है। इसलिये अब मैं उतर आया हूं कि उन्हें मिस्रियों के वश से छुड़ाऊं, और उस देश से निकालकर एक अच्छे और बड़े देश, कनान में पहुंचाऊं जिसमें दूध और मधु की धाराएं बहती हैं। “मैं तुझे फिरौन के पास भेजता हूं कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को…

हमें कैसे प्रार्थना करनी चाहिए?

प्रार्थना परमेश्वर और हमारे बीच एक आत्मिक बातचीत है। हमें परमेश्वर के अस्तित्व पर दृढ़तापूर्वक विश्वास करना चाहिए और इस पर विश्वास करते हुए कि परमेश्वर जो हम मांगते हैं उसे हमें देंगे, अपने पूरे मन और पूरे हृदय से प्रार्थना करनी चाहिए। आइए हम विस्तार से समझें कि हमें कैसे प्रार्थना करनी चाहिए। 1) पहले हमें परमेश्वर के राज्य और उनकी धार्मिकता की खोज करनी चाहिए यदि हम स्वार्थ सिद्धि के लिए या परमेश्वर की इच्छा के विरोध में प्रार्थना करेंगे, यह एक बच्चे के जैसा है जो बन्दूक या चाकू मांगता है। इसलिए हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना करनी चाहिए। परन्तु तुम पहले परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज में लगे रहो। मत 6:33…

क्यों हम प्रार्थना करते हैं?

हमारे प्रार्थना करने का कारण क्या है? कुछ लोग बिना उद्देश्य के अनिश्चित प्रार्थना करते हैं। लेकिन, यदि हम प्रार्थना करने के कारण और उद्देश्य को जानते हैं, तो हम और अधिक सच्चे दिल से प्रार्थना कर सकते हैं। आइए हम देखें कि हमें क्यों प्रार्थना करनी चाहिए। 1) परमेश्वर का धन्यवाद करने के लिए हमारे प्रतिदिन के जीवन में, हम बहुत बार परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम का अनुभव करते हैं और उनका एहसास करते हैं। हम उन बहुत सी आशीषों के लिए जो परमेश्वर हम पर बरसाते हैं, धन्यवाद करने के लिए प्रार्थना करते हैं। हम धन्यवाद की प्रार्थना इस प्रकार करते हैं; हम भोजन के समय परमेश्वर से दिन भर की रोटी के लिए धन्यवाद की प्रार्थना…

प्रार्थना क्या है?

प्रार्थना परमेश्वर से आशीष मांगने की एक विधि है। प्रार्थना में हम सिर्फ आशीष नहीं, बल्कि जब हमारे सामने कठिनाइयां आती हैं, सहायता भी मांगते हैं। दूसरों से सहायता लिए बिना, हमारे लिए इस संसार में जीवन जीना मुश्किल है। क्योंकि हमारी क्षमता सीमित है। उसी तरह से हम परमेश्वर से सहायता लिए बिना नहीं जी सकते। इसलिए हमें उन परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए जो हमारी कमजोरी के बारे में जानते हैं और हमारी सहायता करते हैं। मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा, ढूंढ़ो तो तुम पाओगे, खटखटाओ तो तुम्हारे लिए खोला जाएगा। क्योंकि प्रत्येक जो मांगता है उसे मिलता है, और जो ढूंढ़ता है वह पाता है, और जो खटखटाता है उसके लिए खोला जाएगा। मत 7:7–8 इन वचनों…

क्यों हमें परमेश्वर के वचन का अध्ययन करना चाहिए

क्यों हमें परमेश्वर के वचन का अध्ययन करना चाहिए? आइए हम बाइबल के द्वारा इसके कारणों को जानें। 1. हमारी आत्मा के जीवन के लिए परमेश्वर का वचन आत्मिक भोजन है। यीशु ने कहा कि हम परमेश्वर के वचन से जीवित रहेंगे। यीशु ने उत्तर दिया : “लिखा है, ‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा।’ ” मत 4:4 क्या लोग बिना खाए जी सकते हैं? नहीं। यदि हम भोजन न खाएं, तो हम समय बीतने पर कमजोर हो जाएंगे और आखिरकार अपना जीवन खो देंगे। हमारी आत्माओं के साथ भी ऐसा ही है। यदि हम आत्मिक भोजन, परमेश्वर का वचन न खाएं, तो हमारे पास आत्मिक…

क्यों सदस्यों को एक दूसरे की सेवा करनी चाहिए

परमेश्वर ने हमसे “सेवा करनेवाले” बनने को कहा है। हम, स्वर्गीय संतानों को परमेश्वर की शिक्षा को अभ्यास में लाकर परमेश्वर को प्रसन्न करना चाहिए। आइए हम, बाइबल के द्वारा इसका कारण देखें कि हमें एक दूसरे की सेवा क्यों करनी चाहिए। पहला, यह इसलिए क्योंकि मसीह ने स्वयं सेवा करने का नमूना दिखाया है। “... परन्तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने; और जो तुम में प्रधान होना चाहे, वह तुम्हारा दास बने; जैसे कि मनुष्य का पुत्र; वह इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे।” मत 20:26-28 पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर सबसे ऊंचे और…

हमें एक दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

परमेश्वर तब प्रसन्न होते हैं जब उनकी संतानें एकजुट होती हैं(भज 133:1; फिल 2:1-2)। हालांकि, यदि हम एक दूसरे के साथ असभ्य व्यवहार करते और एक दूसरे के प्रति विचारशील नहीं रहते, तो एक बनना मुश्किल होगा। इसलिए, हमें प्रेम के प्रति विनम्र और विचारशील होकर एकता को पूरा करना चाहिए जिससे परमेश्वर प्रसन्न होते हैं। फिर, आइए हम देखें कि हमें एक दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। पहला, हमें शिष्टाचार के साथ एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए। मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं कि एक दूसरे से प्रेम रखो; जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। यूह 13:34 परमेश्वर ने कहा कि हमें एक दूसरे…

क्यों हमें धीरज रखना चाहिए

हमारे विश्वास के जीवन में, क्यों हमें धीरज रखना चाहिए? आइए हम बाइबल के द्वारा कारणों को जानें। 1. उद्धार पाने के लिए “भाई, भाई को और पिता पुत्र को, घात के लिए सौंपेंगे, और बच्चे माता-पिता के विरोध में उठकर उन्हें मरवा डालेंगे। मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे, पर जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।” मत 10:21-22 बाइबल हमें सिखाती है कि जो अंत तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा। इसलिए हमें उद्धार पाने के लिए अंत तक धीरज रखना चाहिए। हमारा विश्वास कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि हम अंत तक धीरज रखने में नाकाम होकर सत्य का मार्ग छोड़ दें, तो हमारा विश्वास व्यर्थ हो…

मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियां दूंगा

यीशु ने कैसरिया फिलिप्पी के प्रदेश में आकर अपने चेलों से पूछा, "लोग मुझे क्या कहते हैं?" "कुछ तो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला कहते हैं, और कुछ एलिय्याह!" "कुछ यिर्मयाह या भविष्यद्वक्‍ताओं में से कोई एक कहते हैं!” चेलों के जवाब पर, यीशु ने उन्हें फिर से पूछा, "परन्तु तुम्हारे बारे में क्या? तुम मुझे क्या कहते हो?” पतरस आत्मविश्वास से भरी आवाज में जवाब देता है। "आप जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह हैं।" "पतरस, तू धन्य है; क्योंकि मेरे पिता ने जो स्वर्ग में हैं, यह बात तुझ पर प्रगट की है।" यीशु ने पतरस को विशेष अनुग्रह दिया जिसने उन्हें परमेश्वर के रूप में पहचाना। "तू पतरस(पत्थर) है। मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा, और अधोलोक के फाटक…

उनसे कहना, “प्रभु को इस का प्रयोजन है”

जब वे यरूशलेम के निकट पहुंचे, तो यीशु ने गांव में दो चेलों को भेजा। “सामने के गांव में जाओ, और उस में पहुंचते ही एक गदही का बच्चा, जिस पर कभी कोई नहीं चढ़ा, बंधा हुआ तुम्हें मिलेगा। उसे खोल लाओ। यदि तुम से कोई पूछे, ‘यह क्यों करते हो?’ तो कहना, ‘प्रभु को इस का प्रयोजन है,’ और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा।” जब चेले गांव में गए, तो उन्होंने गदही के बच्चे को बाहर द्वार के पास चौक में बंधा हुआ पाया जैसा यीशु ने कहा था। जब चेलों ने उसे ले जाने के लिए रस्सी को खोला, उनमें से जो वहां खड़े हैं, एक आदमी ने पूछा, “तुम उसे क्यों खोल रहे हो?” “प्रभु ने…

परमेश्वर ने सारी छावनी को हमारे वश में कर दिया है

गिदोन और उसका सेवक फूरा दुश्मन की छावनी में छिपकर मिद्यानी सैनिकों की बातचीत सुन रहे हैं। यह परमेश्वर के वचन के कारण था जो उन्होंने मिद्यानी छावनी के विरुद्ध लड़ने के लिए 300 योद्धाओं को चुनने के बाद कहा था। “उठ, दुश्मन की छावनी पर चढ़ाई कर; क्योंकि मैं उसे तेरे हाथ कर देता हूं। परन्तु यदि तू चढ़ाई करते डरता हो, तो अपने सेवक फूरा को संग लेकर मिद्यानी छावनी के पास जाकर सुन कि वे क्या कह रहे हैं। उसके बाद तुझे उस छावनी पर चढ़ाई करने का साहस होगा।” उस रात, वे उतर गए और देखा कि मिद्यानी, अमालेकी और सब पूर्वी लोग तो टिड्डियों के समान बहुत से तराई में फैले पड़े थे। और उनके…