सुसमाचार के सैनिक

बाइबल में युद्ध का इतिहास बहुत बार लिखा गया है। युद्ध की हार–जीत इस पर निर्भर करती थी कि परमेश्वर इस्राएलियों के साथ था या नहीं। बाइबल में ऐसा उल्लेख क्यों किया गया है? यह हमें इसकी शिक्षा देता है कि हमें किस विश्वास और रवैए से आत्मिक युद्ध करना चाहिए। परमेश्वर ने सुसमाचार के सैनिक के रूप में हमें बुलाया है। आइए हम जांच करें कि सुसमाचार के सैनिक के लिए किस मानसिक रवैए और तैयारी की आवश्यकता है, और इस समय सुसमाचार के सैनिक के रूप में शस्त्र–सज्जित करें। सैनिक के चुनाव के लिए परमेश्वर का मानदण्ड हमें गिदोन के समय के इतिहास में यह दृश्य मिलता है जिसमें परमेश्वर ने सैनिकों को चुना। इस्राएली मिद्यान के अधीन…

माता के द्वारा सौंपा गया कार्य

जो विश्वास के एक सही मार्ग पर चलते हैं, वे निश्चय ही एक विशेष बदलाव पाते हैं। जब लोग परमेश्वर पर विश्वास करना शुरू करते हैं, तब वे कैसे बच सकते हैं और स्वर्ग जा सकते हैं, इसके बारे में सोचते हैं। जैसे-जैसे वे नई वाचा के सत्य में अपने उद्धार के विषय में विश्वस्त हो जाते हैं, वे परमेश्वर के हृदय के सदृश होने लगते हैं जो सारी मानव जाति को बचाना चाहते हैं। यदि पहले हम केवल अपने बारे में चिन्ता करते थे, तो अब हमें पूरे संसार की ओर देखना चाहिए। परमेश्वर ने हमें उद्धार और दूसरे बहुत से आशीर्वाद दिए हैं। यदि हम सत्य में हैं और पिता और माता पर विश्वास करते हैं, तो हमें…

सन्तुष्ट रहना सीख लो

हाल ही में, सुसमाचार विदेश में बहुत ही जल्दी प्रसारित किया जा रहा है। क्योंकि सिय्योन परिवार के सदस्य प्रत्येक परिस्थिति में संतोषी रहते हैं और हमेशा परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं, इसी कारण परमेश्वर उन्हें पवित्र आत्मा की शक्ति बढ़ाने पर बल दे रहा है। आर्थिक और सांस्कृतिक हर दृष्टि से सुसमाचार का प्रचार करना बिल्कुल आसान नहीं है, फिर भी सिय्योन के सदस्य खुश मन से और स्वेच्छा से सुसमाचार की सेवा कर रहे हैं। हरेक सदस्य कहता है कि जितनी मुश्किल और कठिन स्थिति होती है, उतना ही ज्यादा उसे महसूस होता है कि पिता और माता उसके साथ है। वे दुख और पीड़ा में भी कुड़कुड़ाए बिना निरन्तर खुशी रहते हैं और धन्यवाद देते हैं, तो…

परमेश्वर जिसने उद्धार दिया

समय हमारा इन्तजार नहीं करता, पर अनन्तकाल की ओर तेजी से चल रहा है। जब हम फिर कर पिछले समय को देखते हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर के, जिसने उद्धार दिया, प्रेम व अनुग्रह के लिए धन्यवाद और स्तुति दें। सन्तान अपने पालन-पोषण करने वाले मां-बाप के प्रयत्न को नहीं जानती। नासमझ सन्तान यह महसूस नहीं कर पाती कि मां-बाप ने उसके बचपन में कितना प्रयास और बलिदान किया, और वह प्रौढ़ होने के बाद भी, मानो वह अपने आप बढ़ गया हो, मां-बाप के प्रेम और बलिदान को भूल जाती है। उसी तरह से जो हमें अनन्त जीवन देते हैं और स्वर्ग में अगुवाई करते हैं, स्वर्गीय पिता और माता के प्रेम की चौड़ाई व गहराई…

सुलैमान का न्याय और माता

बाइबल परमेश्वर के बारे में साक्षी देने की पुस्तक है, अर्थात् यह एलोहीम परमेश्वर, यानी पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर की साक्षी देती है। बाइबल की 66 पुस्तकें न केवल पिता परमेश्वर की साक्षी देती है, बल्कि ये माता परमेश्वर के बारे में सत्य की साक्षी, आदम व हव्वा के बीच संबंध, इब्राहीम परिवार का इतिहास, नई यरूशलेम की भविष्यवाणी, आदि के द्वारा देती हैं। मसीह पिता और माता जानना बाइबल में सब से बड़ा रहस्य है, पर बाइबल कहती है कि लोगों की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर(शैतान) ने अन्धा कर दिया है कि वे मसीह के तेजोमय सुसमाचार की ज्योति को, न देख सकें।(2कुर 4:4) जिन्होंने मसीह के लहू से छुटकारा पाया है, केवल वे ही परमेश्वर…

बिना मेरे द्वारा

परमेश्वर के मानव जाति को बाइबल देने का मकसद उनके आत्माओं का उद्धार देना है। बाइबल हमें उद्धार पाने के लिए बुद्धि देती है।(1पत 1:9, 2तीम 3:15–17 संदर्भ) परमेश्वर पर पूरी लगन से विश्वास करने पर भी, यदि कोई उद्धार का रास्ता न जानने से उद्धार न पा सके, तो वह बहुत अभागा आदमी होगा। आत्माओं का उद्धार पाने के लिए, बाइबल को, जिसमें परमेश्वर का वचन है, सही रूप से समझना और महसूस करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ने बाइबल में उद्धार का रास्ता बताया है। यह ही हमारे बाइबल को यत्न सहित पढ़ने का कारण है। मार्ग, सत्य और जीवन परमेश्वर ही है परमेश्वर ने प्रत्येक युग में नबी के द्वारा अपना वचन सुनाया था। मूसा के समय, उसने…

नम्रता का गुण

"मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।" जब मसीह ने राज्य का सुसमाचार प्रचार करना शुरू किया, उसने हम से सब से पहले, मन फिराने पर बड़ा जोर दिया।(मत 4:17) मन फिराव के लिए पहला कदम यह है, स्वयं को पापी मान कर दीन करना। इसलिए स्वर्ग की आशा रखकर, पूर्ण पश्चात्ताप करने के लिए हमें नम्रता का गुण सीखना चाहिए। नम्रता का विपरित गुण घमण्ड है। जब हम यहेजकेल अध्याय 28 में ‘सूर का राजा' और यशायाह अध्याय 14 में ‘बेबीलोन का राजा' के पिछले जन्म की बातें देखें, तब हम जान सकते हैं कि घमण्ड ही पाप का मूल है। घमण्ड से चूर होकर, हम स्वर्ग में उषाकाल के पुत्र, भोर के तारों के पाप…

एक व्यक्ति की भूमिका

प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित कार्यभार के साथ जन्म लेता है। इसलिए इस पृथ्वी परजन्मा कोई भी व्यक्ति निकम्मा नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति छोटे या बड़े पैमाने पर, दूसरे लोगों के जीवन को प्रभावित करते हुए मानव इतिहास में एक भूमिका नीभा रहा है। मैं ने एक बार “पेड़ लगाने वाला मनुष्य” नामक कहानी पढ़ी थी। एक सुनसान और उजाड़ पहाड़ी इलाके में, कहानी का कथावाचक एक दिन एक मनुष्य से मिला जो प्रतिदिन 100 शाहबलूत के बीज बोता था। कुछ साल बीत गए, और जब वह कथावाचक फिर से उसी जगह पर गया, तो आश्चर्यजनक रूप से वह उजाड़ भूमि सुंदर और उपजाऊ बन गई थी। उस एक मनुष्य के कारण जिसने यह न सोचते हुए कि लोग उसको समझेंगे…

जीवन के जल का सोता

यरूशलेम माता के उद्धार का समाचार पूरे विश्व में प्रसारित होता जा रहा है, जिससे संसार के प्रत्येक महाद्वीप में अनेक आत्माएं परमेश्वर के पास आ रही हैं। माता की सच्चाई आत्मिक मास्टर कुंजी है जो कहीं भी बन्द मनुष्यों के मन को खोल सकती है। यह कितना आश्चर्यजनक है! लोग, जिन्होंने कई वर्ष तक सुसमाचार को नहीं सुना था, थोड़े समय के अन्दर खुले मन से सत्य को स्वीकार करते हैं। माता परमेश्वर के बारे में सत्य ने ही ऐसे असंभव कार्य को संभव कर दिया है। बाइबल ने भविष्यवाणी की कि जीवन का जल यरूशलेम से बह निकलेगा और जहां जहां यह जल बहता है, वहां वहां सभी प्राणी जीवन पाएंगे। आइए हम जीवन के जल के सोते…

पहिलौठे का अधिकार और सौभाग्य

हमारे सिय्योन के परिवार के सदस्यों ने संसार के सभी क्षेत्रों में बड़ी मेहनत से सुसमाचार के खेतों की जुताई की है। अब इस आत्मिक शरद् ऋतु में उनका पसीना और उनकी मेहनत बहुतायत से फल पैदा कर रही है। हम उन एलोहीम परमेश्वर को धन्यवाद और प्रशंसा चढ़ाते हैं जो भविष्यवाणियों के अनुसार बहुतायत से अच्छे फलों से हमें आशीर्वादित करते हैं। मैं विश्वास करता हूं कि हम सभी सदस्यों ने दास की नहीं, लेकिन पुत्र की मानसिकता के साथ नई वाचा के सुसमाचार का प्रचार किया है, इसलिए परमेश्वर ने हमारे हृदयों को देखकर जगत की उत्पति से पहले तैयार किए गए अच्छे फलों से हमें सिय्योन भरने की अनुमति दी है। हम दास नहीं, लेकिन स्वर्ग के…

अपने सारे मन और अपनी सारी बुद्धि के साथ

एक कहावत है कि “यदि कोई दृढ़ निश्चय के साथ एकाग्र होकर काम करे तो उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है।” इसका मतलब है कि यदि हम अपना मन केन्द्रित करें, तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो हम न कर सकें। जब नया साल आता है, तब लोग अलग–अलग योजनाएं बनाते हैं, लेकिन उन में से ज्यादातर साल के अंत तक अपनी सारी योजनाओं को पूरा नहीं करते। जो एक ही समय में बहुत से काम करने की कोशिश करते हैं वे कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। लेकिन लोग जो एक ही उद्देश्य के लिए लगातार संघर्ष करते रहते हैं, वे आज नहीं तो कल, अंत में अपना उद्देश्य हासिल करते हैं। जो अपने पूरे मन से…

एक दूसरे की सहायता करते हुए मिलकर प्रचार करना

हमारे पिता ने कहा था कि‚ “सेना तुरही की आवाज पर आगे बढ़ती है‚ और परमेश्वर के लोग भविष्यवाणी की आवाज पर आगे बढ़ते हैं।” तो अब‚ हमें कौन सी भविष्यवाणी की आवाज पर ध्यान देना चाहिए? यह परमेश्वर का वचन है कि‚ “एक दूसरे की सहायता करते हुए सुसमाचार का कार्य पूरा करो।” आइए हम बाइबल का अध्ययन करते हुए इस भविष्यवाणी में छिपी परमेश्वर की इच्छा को समझें। मसीह के उदाहरण का पालन करो परमेश्वर चाहते हैं कि हम यीशु मसीह के उदाहरण के अनुसार एक मन हो जाएं। धीरज और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। ताकि तुम एक मन और एक स्वर में हमारे…

संसार का उद्धार परमेश्वर पर निर्भर है

परमेश्वर सुसमाचार के कार्य में सब से प्रथम स्थान पर होकर, हमारा उद्धार करने के कार्य का नेतृत्व करता आया है। वह हमेशा अनदेखे रूप से हमारी अगुवाई करते हुए भी, सभी सफलता का गौरव केवल सन्तान को देता है। पुराने नियम के समय भी, नए नियम के समय भी, और आज भी, पिता और माता की सहायता से सभी महान कार्य पूरे हुए हैं। हमारे परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध रहते हुए भी, परमेश्वर हम से अपनी पीठ कभी नहीं फिरता, बल्कि हमारे सब पापों पर पछताने तक वह धीरज के साथ हमारा इन्तजार करके हमें अनन्त निज देश, स्वर्ग में ले जाता है। हम स्वर्गीय पिता और माता के अनुग्रह के लिए धन्यवाद और स्तुति देते हैं। संसार…

उन कामों का अफसोस जो हमने नहीं किए

लोग उन कामों के लिए अफसोस करते हैं जो उन्होंने पहले नहीं किए। जब वे किसी विदेशी से मिलते हैं और उनसे बात नहीं कर पाते, तो वे अपने स्कूल के दिनों में विदेशी भाषा को अच्छे से न सीखने का अफसोस करते हैं। जब वे बड़े हो जाते हैं, तो उनकी छोटी उम्र में उनके माता–पिता के उन्हें अच्छे से पढ़ाई करने और उत्सुकता से कार्य करने के लिए कहने पर भी उनकी बात न सुनने का वे अफसोस करते हैं। हमारे जीवन में ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनका हमें अफसोस हो सकता है। हालांकि, हमें आत्मिक रूप से ऐसा जीवन जीना चाहिए जिसमें कोई भी अफसोस न हो। परमेश्वर ने हमें सत्य दिया है जो हमें कभी…

भय और एक तोड़ा

बाइबल भय को दो तरह से वर्णन करती है: “परमेश्वर का भय मान” और “भयभीत न हो।” बाइबल हमें परमेश्वर का भय मानने के लिए इसलिए नहीं कहती है कि परमेश्वर डरावने हैं, बल्कि इसलिए कहती है कि परमेश्वर हमारे सृजनहार और उद्धारकर्ता हैं। और दूसरी तरफ बाइबल हमें भयभीत न होने के लिए भी कहती है। इसका मतलब है कि हमें परमेश्वर के अलावा किसी भी चीज या व्यक्ति से भयभीत नहीं होना चाहिए। यीशु के द्वारा दिए गए तोड़ों के दृष्टान्त में, वह जिसने एक तोड़ा पाया था, डर गया था, और उसने अपना एक तोड़ा मिट्टी में छिपा दिया था। परमेश्वर ने हम से कहा है कि हमारे पास ऐसा डर नहीं, लेकिन एक निडर विश्वास होना…

परमेश्वर, जितना महसूस होता है, उतना दिखाई देता है।

नई वाचा के सेवकों के यत्नपूर्वक वचन का प्रचार करने के द्वारा, अब सारे क्षेत्रों में और विदेशों में, नये परिवार, सत्य को ढूंढ़ कर सिय्योन में वापस आ रहे हैं। जगह का ध्यान किए बिना प्रचारक कहीं भी प्रचार कर रहे हैं। कोरिया में और विदेश में, कहीं भी हो, प्रचारक प्रचार करने में लगे रहते हैं। कभी विमान में सवार हुए और कभी वायुयान वाहक में सवार हुए और कभी सेना में यत्नपूर्वक प्रचार कर रहे हैं। चाहे ज़मीन पर हो, या चाहे समुद्र पर हो, या चाहे हवा में हो, कहीं भी निर्भयता से परमेश्वर के वचन को सुनाते हैं, जिसके द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का कार्य शीघ्रता से पूरा हो रहा है। बहुतेरे सिय्योन के परिवार,…

फसह के बलिदान का अर्थ

जैसा वचन है, ‘विश्वास तो आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय है।’, सिय्योन के परिवार ने, जो भविष्यवाणी पर सम्पूर्ण विश्वास करता और परमेश्वर के राज्य की अभिलाषा करता है, सारे संसार में यरूशलेम माता की महिमा दिखाई है, जिसके परिणाम-स्वरूप अनेक आत्माएं सिय्योन में वापस आ रही हैं। यदि हम पिता और माता पर गर्व महसूस करते और उनकी महिमा प्रकट करते हैं, तब पिता और माता हमें बहुतायत में आशीषित नतीजा देंगे। इस बार हम फसह के बलिदान का अर्थ हमारे दिल को लगाते हुए, परमेश्वर के मांस और लहू के विषय में साथ विचार करने का समय लेंगे। माँ जिसने अपने मांस और लहू से बच्चे को बचाया यह घटना तब हुई जब रूस में बड़े भूकंप…

माता परमेश्वर का प्रेम

पिछले समय को देखते हुए, हम महसूस कर सकते हैं कि जैसे हम ने शारीरिक माता से प्रचुर प्रेम पाया है, वैसे ही हम ने आत्मिक माता से अगम्य प्रेम पाया है। चाहे हमारी शक्ति कमी हो और हमारे पास कुछ भी नहीं हो, तो भी स्वर्गीय माता हमें चुन कर अनन्त स्वर्ग के राज्य में हमारी अगुवाई करती है। हम इस अनुग्रह के लिए सच्चे दिल से धन्यवाद देते हैं। प्रेम के साथ अनुकूल स्थिति व जरूरी चीजों को देते हुए, माता हमेशा हमारे साथ रहती है। अब इस क्षण भी, माता हम पर, जिन्हें बहुत चीजों में कमी होती है, विश्वास करते हुए और हमें सांत्वना देते हुए, अनन्त स्वर्ग तक हमें ले जा रही है। इस समय,…

इस युग का सबसे महत्वपूर्ण कार्य

हर कोई सहज रूप से मूल्यवान और अर्थपूर्ण कार्य करना चाहता है। बाइबल में लिखा गया है कि, “जैसे मनुष्यों के लिए एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।”(इब्र 9:27) इन शब्दों से, बाइबल मनुष्य को सलाह देती है कि वह इस संसार में जीते समय परमेश्वर की धार्मिकता को खोजे और नए सिरे से जन्मे मनुष्य के समान एक नया जीवन जीए। तब, हमारे जीवन में सबसे ज्यादा अर्थपूर्ण और महत्वपूर्ण कार्य क्या है? मुझे विश्वास है कि सिय्योन के लोग इसका उत्तर पहले से जानते हैं। एलोहीम परमेश्वर स्वयं इस पृथ्वी पर आए, हमें उदाहरण दिया और सबसे मूल्यवान कार्य सौंपा। अब, आइए हम इस पर विचार करने का समय लें कि परमेश्वर के…

अकाल के मध्य में जीवन का जल

‘द प्रिन्स ऑफ़ ईजिप्त’ कार्टून में ऐसी बातचीत है, “मरुस्थल में सोने से कहीं अधिक पानी मूल्यवान है, और भटकती भेड़ के लिए राजा से कहीं अधिक चरवाहा मूल्यवान है।” यह बात सच्च है। यदि कोई भेड़ भटकती है, तो उस भेड़ के लिए सब से आवश्यक क्या होगा? चरवाहा है, जो उसका मार्गदर्शन कर सकता है। जब सूखे में एक बूंद पानी भी नहीं रहता, तो सोने की क्या जरूरत है? और अधिकार का क्या मतलब है? सब बेकार है। जीवित प्राणी पानी के बिना नहीं रह सकता। हमारा आत्मिक जीवन भी वैसा ही है। यदि हमें परमेश्वर के सत्य का वचन, यानी जीवन का जल, प्रदान नहीं किया जाए, तो हम आत्मिक सूखे में भूखे-प्यासे होंगे, अत: अनन्त…