विश्वास और जीवन

यह विश्वासियों को जो मसीह की सुगंध बनने की आशा करते हैं, विश्वास का एक सही जीवन जीने में मदद करता है।

सुबह को खुशी से एक-दूसरे का अभिवादन करें!

अतीत में कोरिया में, एक ऐसा शिष्टाचार था कि हर सुबह संतानें अपने माता-पिता का हालचाल पूछते हुए अभिवादन करती थीं। अपने चेहरा धोकर साफ कपड़े पहनने के बाद, वे अपने माता-पिता का अभिवादन करती थीं और बिस्तर को व्यवस्थित करती थीं या उनके चेहरा धोने के लिए पानी लाया करती थीं। लेकिन व्यस्त आधुनिक समाज में, इस तरह के रीति-रिवाज पहले से ही गायब होते जा रहे हैं, लेकिन अभिवादन का मूल्य अपरिवर्तित रहता है क्योंकि यह एक-दूसरे के अच्छे स्वास्थ्य की आशा करते हुए प्रेम और देखभाल व्यक्त करने का एक तरीका है। इस महीने, आइए हम सुबह खुशी से अपने परिवार का अभिवादन करें। “क्या आप अच्छे से सोए थे?” या “गुड मॉर्निंग!” इस तरह, मुस्कराहट के…

जब आप टीवी बंद करते हैं, तब आप अपने परिवार को देख सकेंगे!

टेलीविजन, यह शब्द प्राचीन यूनानी भाषा से आया है, जिसमें टेली का मतलब है दूर, और विजन का मतलब है दृष्टि। जैसा कि शब्द स्वयं बताता है, टेलीविजन एक प्रसारण प्रणाली है जिससे हम घर पर बैठकर देख सकते हैं कि दूर के स्थान पर, यहां तक कि दुनिया के दूसरी ओर स्थित स्थान में क्या हो रहा है। लेकिन, हमें यह याद रखना चाहिए कि वास्तव में यह हमें अपने परिवार के सदस्यों को देखने से रोकता है जो हमारे बहुत करीब हैं। रोते हुए बच्चे को एक कार्टून चैनल चालू करके दिखाना, या लिविंग रूम में टेलीविजन रखना जहां सभी परिवार के सदस्य इकट्ठे होते हैं, एक रोजमर्रा की बात बन चुकी है। अब चूंकि स्थलीय टीवी चैनल…

बहुत बढ़िया!

एक माता लिफ्ट में एक बच्चा-गाड़ी लेकर चढ़ी। बच्चा-गाड़ी में बैठे बच्चे के बाल चमक रहे थे और आंखों को लुभा रहे थे। फिर मैंने उसकी कलाई पर एक निशान देखा। यह “बहुत बढ़िया” स्टैम्प की तरह था। “नमस्ते। तुम्हारी कलाई पर क्या है?” मैंने उससे जिज्ञासा से पूछा और उसके बजाय उसकी माता ने इसका जवाब दिया। “यह वह स्टैम्प है जो उसे अपने चाइल्डकैअर सेंटर में मिली है। मैंने उसे धुलाते समय हटाने की कोशिश की, तो वह रो पड़ा और मैं इसके आसपास नहीं धो सकी। इसलिए निशान रह गया है।” मैं मुस्कुराया, और कल्पना की कि जब उसकी माता उसे स्नान करा रही थी, वह उस निशान के धोए जाते समय कितना चिंतित हुआ होगा। मुझे…

सियॉन्गनाम, कोरिया से छवे सक हुइ

घर पर हंसी के उपकरणों को रखें!

आपका उज्ज्वल चेहरा और आपकी मुस्कुराहट उन लोगों को जो आपको देखते हैं, आपके समान खुश कर देती हैं। यह आपके आसपास के लोगों को प्रेम व्यक्त करने, प्रोत्साहित करने और सहयोग करने का सबसे अच्छा तरीका है। और ज्यादा हंसने के लिए हंसी के उपकरणों को बनाकर घर के कोने कोने में रखिए। दस सेकंड से अधिक समय तक जोर से हंसने से हंसी का प्रभाव अधिक बढ़ जाएगा। विभिन्न हंसी के उपकरणों का उपयोग करके परिवार के साथ जी भरकर हंसिए। दुर्भाग्य दूर भागेगा और आपका घर खुशी से भर जाएगी। टिप्स​ हंसी का क्षेत्र: जब भी आप इस क्षेत्र में हैं तो हंसें। (वहां पर यह लिखकर चिपकाएं, “हंसी का क्षेत्र” या “जोर से हंसिए।”) हंसी की…

आइए हम प्लास्टिक को कम करें!

प्लास्टिक के उपयोग से होने वाला पर्यावरण प्रदूषण एक वैश्विक मुद्दा बन गया है। प्लास्टिक को कम करने की नीति की घोषणा करते हुए, भारत सरकार प्लास्टिक को कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उसका समर्थन करने के लिए, भारत के पुणे में चर्च ऑफ गॉड के सदस्य और कोरिया के ASEZ सदस्यों ने एक साथ मिलकर ‘'प्लास्टिक को कम करें’ नामक अभियान चलाया। “भारत को बचाएं! पृथ्वी को बचाएं! माता के प्रेम के साथ!” जोर से नारा लगाते हुए, हम आगे बढ़े। भारत में कुछ घंटों के लिए बैनर-पोस्टर को पकड़ना और चलना आसान नहीं था, जहां सड़कों का रखरखाव अच्छी तरह से नहीं किया गया है। इसके अलावा, हमारी पूरी जुलूस के दौरान बारिश…

इंचियोन कोरिया से ह्यन यंग ग्यंग

विचारों का परिवर्तन

हर हफ्ते, मैंने ASEZ क्लब के सदस्यों के साथ अपने कॉलेज के आसपास की सड़क को साफ किया। लेकिन मैं जान गया कि पिछले कुछ समय से मैंने लगातार एक ही जगह की सफाई कर रहा हूं, यह इसलिए क्योंकि हमारे सफाई करने के बाद यह कुछ दिनों के अंदर अपनी पिछली स्थिति में लौट जाता था। यहां तक कि मुझे यह विचार आया, ‘क्या कोई जानबूझकर कचरा फेंकता है?’ कचरे से भरी सड़क को देखकर मुझे दुख हुआ क्योंकि मुझे अपने क्लब के सदस्यों के चेहरों की याद आई जिन्होंने पसीने बहाते हुए इसे साफ किया था। कभी-कभी, मुझे ऐसा लगता था कि हमारा स्वयंसेवा कार्य व्यर्थ है। अचानक से, मुझे “विचारों का परिवर्तन” यह वाक्यांश याद आया, जिसे…

बुसान, कोरिया से ली सक जून

क्या पति-पत्नियों के झगड़े जल्द ही मिट जाते हैं?

बहस करने के बाद तुरंत एक दूसरे के साथ सुलह कर लेना अच्छा है, लेकिन एक बहस को झगड़े में न बदलने देना बेहतर है। पति और पत्नी दुश्मनों की तरह झगड़ा कर सकते हैं, लेकिन फिर वे जल्द ही एक दूसरे के साथ सुलह कर लेते हैं जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं। इसलिए यह कहावत है कि, “पति-पत्नियों के झगड़े जल्द ही मिट जाते हैं।” लेकिन, यह पुराने समय की बात बन गई है। साल दर साल तलाक की दर बढ़ती रहती है, और पति और पत्नी के बीच झगड़ा करते हुए क्रोध में आकर घर को जला देने जैसी बहुत सी दुर्घटनाएं और अपराध घटित होते हैं। लोग कहते हैं कि तूफान के बाद शांति आती है।…

मां अपनी संतानों के प्रति प्रेम की शक्ति के मारे कभी हार नहीं मानती

जब मैं बर्तन धो रही थी तब मेरा फोन बजा। वह मेरी मां थी। मैं अनुमान लगा सकी कि वह मुझे क्यों फोन कर रही है। मां ने मुझे कुछ भोजन देने के लिए फोन किया होगा। ‘मुझे उसे पहले फोन करना चाहिए था,’ इस विचार पर मुझे खेद हुआ। मेरी चार बड़ी बहनें और एक छोटा भाई हैं। भले ही मैं चालीस से अधिक वर्ष की हो गई हूं, लेकिन मां की आंखों में मैं अभी तक एक छोटी लड़की हूं जो उसकी चिंता का कारण है। मेरा भाई सबसे छोटा बच्चा है, लेकिन शायद क्योंकि वह भरोसेमंद बेटा है, इसलिए मेरी मां मुझे सबसे छोटी बच्ची की तरह मानती है। मैंने उसे एक बच्ची की तरह “मां!” कहते…

गुमी, कोरिया से ली सु जा

पिनोकिओ प्रभाव

जब कभी पिनोकिओ ने झूठ बोलता है, क्यों उसकी नाक लंबी हो जाती है? क्या उस पर पोलीग्राफह्यझूठ का पता लगाने वाला यंत्रहृ था? यह एक निराधार कहानी नहीं है। अमेरिका में शिकागो के गंध और स्वाद के उपचार और अनुसंधान संस्थान के मुख्य प्रबंधक डॉ। एलन हिर्श ने खोजा कि जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, तब उसकी नाक वास्तव में बढ़ती है क्योंकि ‘कटेकोलामीन’ नामक रसायन स्रावित होता है और अस्थायी रूप से नाक की रक्त वाहिकाओं को फुलाते हैं। चूंकि नाक के अंत के फुला हुआ तंत्रिका ऊतक नाक को गुदगुदाता है, तो झूठा अनजाने में अपनी नाक को रगड़ता या छूता है। इसे ‘पिनोकिओ प्रभाव’ कहा जाता है। वास्तव में, जब एक व्यक्ति झूठ बोलता है,…

चैंपियनशिप जीतने का उपाय

1984 टोक्यो इंटरनेशनल मैराथन में एक अप्रसिद्ध जापानी खिलाड़ी यामादा मोतोची ने अप्रत्याशित रूप से प्रसिद्ध खिलाड़ियों को हराकर स्वर्ण पदक जीता। लोगों ने कहा कि वह बहुत ही भाग्यशाली था। लेकिन इसके दो साल बाद, इतालवी इंटरनेशनल मैराथन में भी यामादा ने फिर से चैंपियनशिप जीत ली। लंबे समय के बाद उसने चैंपियनशिप जीतने के उपाय का इस प्रकार खुलासा किया: “हर मैराथन प्रतियोगिता शुरू होने से पहले, मैं अपने कोर्स को अच्छी तरह देखता हूं और बारीकी से जांचता हूं। मैं अपनी एक जेबी–नोटबुक में वहां की सभी महत्वपूर्ण इमारतों या पेड़ों के बारे में लिखता हूं और फिर पूरे मैराथन के कोर्स को कई भागों में बांटता हूं। उसके बाद मैं लक्ष्य बनाता हूं; उदाहरण के लिए,…

छुट्टियों में दिया गया असामान्य होमवर्क

“नंगे पैर जमीन पर चलना, खामोशी से सूर्यास्त को देखना, जंगल में एक पेड़ को गले लगाना और उससे बात करना, अपने आपको एक जंगली फूल की ऊंचाई तक ले आना और उससे बात करना, अपने बाथरूम और शौचालय को साफ करना, मुसलाधार वर्षा को महसूस करने के लिए उसके नीचे खड़े रहना और आपके आसपास बह जाने वाली चीजों का निरीक्षण करना, खुद खाना बनाना और अपने परिवार के लिए मेज सेट करना, अपने माता–पिता के कार्यस्थल का दौरा करना, अपने परिवार के साथ बगीचे की मेहंदी से अपने नाखूनों को रंगना, कैम्पिंग के दौरान तम्बू में सोना, और अपने मित्र या शिक्षक को एक पत्र लिखना।” ये कोरिया के गांगवन प्रांत में, एक लड़कों के माध्यमिक पाठशाला में…

सफलता का रहस्य

एक लड़का बचपन से हमेशा यह देखते हुए बड़ा हुआ कि उसका पिता जो पेस्ट्री शेफ था, हमेशा गाना गाते हुए काम करता था। तो उसे सहज रूप से गीत गाना पसंद आया, और वह संगीत सीखना चाहता था। दूसरी ओर, वह विज्ञान भी पढ़ना चाहता था और शिक्षक भी बनना चाहता था। जब वह बहुत सारी चीजें एक समय में करने की चाह रखने के कारण हिचकिचा रहा था, तब पिता ने उससे कहा, “यदि तू एक ही समय में दो कुर्सियों पर बैठने की कोशिश करे, तो कुर्सियों के बीच गिर जाएगा। जीवन इसके समान है।” लंबे समय तक विचार करने के बाद वह एक ओपेरा गायक बनना चुना। बीस साल के बाद, वह विश्व प्रसिद्ध ओपेरा गायक…

माता की शिक्षाओं में से पहली शिक्षा

"जैसे परमेश्वर हमेशा प्रेम देते हैं, वैसे प्रेम पाने से ज्यादा आशीष, प्रेम देने में है।"

ऐसा एक पल भी नहीं जिसमें परमेश्वर हमसे प्यार नहीं करते। जब हम स्वर्ग में स्वर्गदूत थे, तब परमेश्वर ने हमेशा प्यार से हमारा लालन पालन किया। यहां तक कि जब हम स्वर्ग में गंभीर पाप करके इस पृथ्वी पर गिरा दिए गए, हमारे पापों की क्षमा करने के लिए हमारे बदले परमेश्वर ने क्रूस पर अपना बलिदान किया, जिससे उन्होंने हमारे प्रति अपना प्रेम साबित किया। इस पल भी परमेश्वर हमारे जैसे मनुष्य के रूप में पापियों की भूमि पर निवास करते हुए हमारी देखभाल कर रहे हैं। इस प्रकार, परमेश्वर हमेशा प्यार देते हैं और कहते हैं, "जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो"(यूह 13:34)। परमेश्वर चाहते हैं कि…

माता की शिक्षाओं में से दूसरी शिक्षा

"जब हम परमेश्वर को महिमा देते हैं, वह महिमा अंत में हमें दी जाएगी।"

जब हम प्रचुर फल वाले एक वृक्ष को देखते हैं, तब हम केवल फल और डालियां जैसे दृश्य हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और जड़ों की उपेक्षा करते हैं। परन्तु, जड़ों की भूमिका अत्यंत आवश्यक है; वे जब तक वृक्ष अच्छा फल नहीं फलता तब तक पानी और पोषण प्रदान करती हैं। जड़ों के बिना, वृक्ष का अस्तित्व नहीं हो सकता। इसके अतिरिक्त, यदि जड़ें ठीक से काम न करें तो डालियां कितनी भी मोटी और प्रबल होने पर भी वृक्ष स्वयं जीवन बनाए नहीं रख सकता या फल पैदा नहीं कर सकता। इसी तरह, हर कार्य जो हमने किया, हमारी स्वयं की शक्ति और बुद्धि से की गईं उपलब्धियां जैसा लगता है, परन्तु वह परमेश्वर की सामर्थ्य से…

माता की शिक्षाओं में से तीसरी शिक्षा

"सुंदर मन में कोई घृणा नहीं होती और वह एक संपूर्ण प्रेम को जन्म देता है।"

संसार में कोई भी संपूर्ण नहीं है क्योंकि हम सब पापी हैं। प्रत्येक में खूबियां और कमियां हैं। चाहे किसी का चरित्र कितना भी अच्छा क्यों न लगता हो, उसमें कुछ कमियां होती हैं, और चाहे किसी का चरित्र कितना भी दोषपूर्ण क्यों न लगता हो, उसमें कुछ खूबियां होती हैं। यदि हमारे मन में घृणा है तो हम दूसरों में केवल दोष पांएगे, परन्तु जब हमारे पास सुंदर मन होता है, तब हम कुछ अच्छी और सुंदर बातें खोज सकते हैं। हर परिस्थिति में सुंदर मन रखना आसान नहीं है। लेकिन, यदि हम परमेश्वर के वचन पर निर्भर रहकर हमारे भाइयों और बहनों को सुंदर मन के साथ देखें, तो हम जैसा माता की शिक्षाओं में वर्णित है वैसे…

माता की शिक्षाओं में से चौथी शिक्षा

“जैसे अब्राहम ने अपने भतीजे लूत को अच्छी वस्तुएं देने पर अधिक आशीषें प्राप्त कीं, वैसे ही जब हम अपने भाइयों और बहनों को अच्छी वस्तुएं देंगे, तब हम भी बहुतायत में आशीष प्राप्त करेंगे।”

परमेश्वर ने अब्राहम से कहा कि वह अपने भतीजे लूत के साथ कनान देश में जाए जैसे-जैसे उनकी भेड़-बकरियां और परिवारों की संख्या बढ़ती गई, जहां वे रहते थे वह भूमि दोनों के लिए बहुत छोटी हो गई। तब उनके चरवाहों के बीच मतभेद बढ़ता गया। अब्राहम ने लूत को सुझाव दिया कि वह अलग हो जाए ताकि उनके चरवाहे एक दूसरे से न लड़े। यद्यपि अब्राहम लूत से पहले अच्छी भूमि चुन सकता था, लेकिन उसने लूत को पहले अपनी भूमि चुनने की अनुमति दी, और फिर अब्राहम को वह भूमि मिली जिसे लूत ने नहीं चुना। अब्राम और लूत की भेड़–बकरी और गाय–बैल के चरवाहों में झगड़ा हुआ। उस समय कनानी और परिज्जी लोग उस देश में रहते…

माता की शिक्षाओं में से पांचवीं शिक्षा

“अपेक्षाएं पूरी न होने पर महसूस होनेवाली निराशा, घमंड है।”

जब किसी व्यक्ति को मिलने वाला व्यवहार या सेवा उसकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होती, तब वह निराश महसूस करता है। निराशा की ऐसी भावना उस मन से उत्पन्न होती है जो चाहता है कि दूसरे लोग उसे स्वीकार करें या उसकी सेवा करें, और यह एक अभिमानी मन होता है। हम पापी हैं जिन्होंने स्वर्ग में गंभीर पाप किए और पृथ्वी पर गिरा दिए गए। इसलिए हमें कभी भी अभिमानी नहीं होना चाहिए क्योंकि पापियों को न तो स्वीकार किए जाने का अधिकार है और न ही सेवा प्राप्त करने का। जब हम इस संसार की व्यवस्थाओं को देखते हैं, तो गंभीर अपराध करने वाले अपराधियों को जेल में बंद कर दिया जाता है और उनके सभी अधिकारों और…

माता की शिक्षाओं में से छठी शिक्षा

“भले ही दूसरे काम न करें, आइए हम शिकायत किए बिना ईमानदारी से काम करें। जब हम एक स्वामी के मन से काम करते हैं, तब हम आनंद और शांति से काम कर सकते हैं।”

हम अक्सर ऐसी स्थिति का सामना करते हैं जब हमें अकेले काम करना पड़ता है, जबकि दूसरे काम नहीं कर रहे होते। हम सोच सकते हैं, “वह काम क्यों नहीं कर रहा है?” या “मैं अकेले ही क्यों काम कर रहा हूं?” लेकिन, परमेश्वर ने हमें सिखाया है कि जब हमारे पास स्वामित्व की भावना होती है, तब हम खुशी के साथ काम कर सकते हैं। आइए हम एक स्वामी और उसके सेवकों के बारे में सोचें। सेवक कटनी की ज्यादा परवाह नहीं करते और केवल न्यूनतम प्रयास करते हैं। वे केवल तब मेहनत करने का दिखावा करते हैं जब उनका स्वामी देख रहा होता है, क्योंकि उन्हें अपने काम करने के समय के आधार पर मजदूरी मिलती है। लेकिन,…

माता की शिक्षाओं में से सातवीं शिक्षा

“शिकायत भरे हृदय से घमंड का जन्म होता है। जब हम हमेशा कृतज्ञता भरे हृदय से परमेश्वर की सेवा करेंगे, तब शिकायत और घमंड गायब हो जाएंगे, और हृदय नम्रता से भर जाएगा।”

शिकायत का मतलब है, हमारे हृदय में असंतोष होना। जो लोग संतोष करना नहीं जानते, वे शिकायत करने लगते हैं। चाहे परमेश्वर कितनी भीअनुकूल परिस्थितियां तैयार करें, वे परमेश्वर को धन्यवाद देने के बजाय हमेशा पहले नकारात्मक पहलुओं को देखते हैं। माता ने कहा, “शिकायत भरे हृदय से घमंड का जन्म होता है।” हम शिकायत तब करते हैं जब हम सोचते हैं, ‘यह तरीका सही नहीं है,’ ‘मेरा तरीका उससे बहुत बेहतर है,’ या ‘उसे मेरे साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।’ इन शिकायतों से, हमारे मन में अहंकार पैदा होता है और हम सोचने लगते हैं, ‘मैं सब से बेहतर हूं।’ चूंकि अहंकार हमारी आत्मा को विनाश की ओर ले जाता है, इसलिए हमें किसी भी परिस्थिति में शिकायत…

माता की शिक्षाओं में से आठवीं शिक्षा

“जब हम अपने भाइयों और बहनों की प्रशंसा करें, वह प्रशंसा हमारे पास लौट आएगी।”

शब्दों में बड़ी शक्ति होती है और वे गूंज की तरह होते हैं। जब हम दूसरों की प्रशंसा करते हैं, तो वह प्रशंसा हमारे पास लौट आती है। जब हम दूसरों को दोष देते हैं, तो वे भी हमें दोष देते हैं। इसी कारण माता ने हमें सिखाया, “जब हम अपने भाइयों और बहनों की प्रशंसा करें, वह प्रशंसा हमारे पास लौट आएगी।” जब हम इस शिक्षा को याद रखते हैं और छोटी-छोटी बातों में भी एक दूसरे की प्रशंसा करते हैं और एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं, तो वह प्रशंसा और प्रोत्साहन हमारे पास लौट आएगा। इसके अलावा, परमेश्वर, जो सब कुछ याद रखते हैं, हमारी प्रशंसा करेंगे और हमें आशीष देंगे। “इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो…