यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

नई वाचा का सब्त

परमेश्वर ने हमारे उद्धार के लिए बाइबल की 66 पुस्तकें लिखीं और प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के अंत में चेतावनी दी कि बाइबल के वचनों में न तो कुछ बढ़ाना और न ही उनमें से कुछ निकालना। यह हमें इस बात को समझने देता है कि परमेश्वर के वचन में कितना अधिकार निहित है। केवल वे ही लोग जो एक शब्द भी छोड़े बिना बाइबल के हर एक वचन को महत्व देते हैं परमेश्वर के उद्धार की प्रतिज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। नई वाचा में फसह, सब्त, पर्व, ओढ़नी का नियम, बपतिस्मा इत्यादि जैसे कई नियम हैं। उनमें से, आइए हम सब्त से जुड़ी बाइबल की शिक्षाओं और उनमें समाई हुई परमेश्वर की इच्छा की जांच करें। सृष्टि के समय स्थापित…

सब्त और परमेश्वर का उद्धार

अगर हम अपने चारों ओर नजर दौड़ाकर देखें, तो वास्तव में हमारे आसपास बहुत सी कीमती चीजें हैं। हालांकि, वे हमेशा हमारे बगल में होते हैं, तो हम अक्सर उनके महत्व को भूल जाते हैं और उनकी उपेक्षा करते हैं। उसी तरह, हम सब्त के अनमोल सत्य की उपेक्षा कर सकते हैं क्योंकि हम इसे मानने के आदी हो गए हैं। जब परमेश्वर ने शुरुआत में सभी चीजें बनाईं, तो उन्होंने छह दिनों तक काम किया और सातवें दिन अपने सभी कार्यों से आराम किया, और विशेष रूप से सातवें दिन को पवित्र बनाया। 3,500 साल पहले, परमेश्वर ने व्यवस्थाओं की घोषणा की और दस आज्ञाओं के पत्थर की तख्तियों पर लिखा, “तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण…

परमेश्वर से प्रेम करने का तरीका

यह स्वाभाविक है कि जब आप किसी से प्रेम करते हैं तो आप उसके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं। लेकिन यदि आप उनकी भावनाओं पर विचार किए बिना अपने ही तरीके से उसके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं, तो क्या होगा? हम कुछ ऐसा भी कर सकते हैं जिसे वे नापसंद करते हैं। क्या इसे हम सच्चा प्यार कह सकते हैं? तो हमें परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को कैसे व्यक्त करना चाहिए? यदि हम अपने तरीके से उनके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं, तो इसे ऐसा नहीं कहा जा सकता कि हम परमेश्वर से सच में प्रेम करते हैं। चूंकि परमेश्वर कहते हैं, “क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे…

फसह और प्रतिज्ञा का चिह्न

आज दुनिया के तमाम हिस्सों में हो रही विपत्तियों की खबरों के कारण पूरे विश्व में तनाव बढ़ रहा है। बाइबल युद्ध और संघर्ष सहित भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट, असामान्य मौसम की घटनाओं जैसी विपत्तियों की चेतावनी हजारों वर्ष पहले दे चुकी थी। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ऐसी विपत्तियां इस पवित्र आत्मा के युग में जिसमें हम जी रहे हैं, एक ही बार में उंडेली जा रही हैं। परमेश्वर ने अपने लोगों को विपत्तियों से रक्षा करने के लिए, इस युग में फसह को पुनर्स्थापित किया है। 3,500 वर्ष पहले, निर्गमन के समय में परमेश्वर ने इस्राएलियों को किसी भी बात से बढ़कर फसह का ज्ञात कराया। यह इसलिए था क्योंकि मिस्र में एक भयंकर विपत्ति आने वाली…

फसह और उद्धार का सत्य

आज, दुनिया परमेश्वर के वचन सुने बिना आत्मिक प्यास और बड़े पैमाने पर हो रही विपत्तियों से पीड़ित है(आम 8:11; यिर्म 44:23)। फिर भी, कुछ लोग परमेश्वर के वचन का इनकार करके यह दावा करते हैं, “नई वाचा का फसह उद्धार का सत्य नहीं है। इसलिए हमें इसे मनाने की आवश्यकता नहीं है।” यीशु ने उन दिनों के धार्मिक नेता, फरीसियों और शास्त्रियों के कपट पर फटकार लगाई और कहा कि स्वर्ग के राज्य के भेदों की समझ उन्हें नहीं दी गई है। अब भी, ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा तो करते हैं, लेकिन परमेश्वर की इच्छा को सही ढंग से नहीं समझते। जैसा कि बाइबल कहती है कि परमेश्वर के ज्ञान के न होने…

फसह और विपत्तियों से पार होने का कारण

परमेश्वर ने शैतान को नष्ट करने और अपनी संतानों को अनंत जीवन देने के लिए फसह की स्थापना की। जो कोई भी सिय्योन में रहता है, वह फसह के महत्व को अच्छी तरह जानता है। अब, हमें और अधिक सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है कि जब हम फसह मनाते हैं तो विपत्तियां हमारे ऊपर से क्यों पार हो जाती हैं। फसह का सही अर्थ क्या है? हमें विपत्तियों से मुक्त करने के लिए फसह की शक्ति का स्रोत क्या है? आइए हम परमेश्वर के सामने विनम्र और शालीन स्वभाव के साथ, बाइबल के द्वारा इन मामलों का अध्ययन करें। फसह के मेमने के लहू के द्वारा विपत्तियों से बचना फसह लगभग 3,500 वर्ष पहले स्थापित किया गया परमेश्वर…

स्वतंत्रता की व्यवस्था, फसह

बाइबल की 66 पुस्तकें भविष्यद्वक्ताओं के व्यक्तिगत विचार या दर्शनशास्त्र के अभिलेख नहीं, लेकिन मानव जाति के उद्धार के लिए दी गई परमेश्वर की शिक्षाएं हैं। चूंकि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हुए उद्धार की अभिलाषा करते हैं, हमें इस बात पर पूरी तरह विश्वास करके परिश्रमपूर्वक बाइबल का अध्ययन करना चाहिए। बाइबल कहती है कि ऊपर की यरूशलेम अर्थात् हमारी माता ‘स्वतंत्र’ हैं और यह कि चूंकि मसीह ने हमें स्वतंत्र कर दिया है इसलिए हम अब और पाप के दास नहीं लेकिन स्वतंत्र हैं(गल 4:26; यूह 8:32-36)। हम स्वतंत्र पिता परमेश्वर और स्वतंत्र माता परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, इसलिए हम स्वतंत्र संतान हैं। आइए हम बाइबल में स्वतंत्रता का अर्थ खोजें और परमेश्वर के अनुग्रह के लिए…

परमेश्वर और हमारे बीच संबंध

परमेश्वर हमें “मेरी प्रजा”, “मेरी संतान” कहते हैं। इसका बड़ा महत्व है। मान लीजिए कि एक मछली है जो मछली की दुनिया में अन्य मछलियों पर एक अच्छा शासक बनने के लिए बुद्धिमान और उदार है। चाहे वह मछली कितनी भी प्रतिभाशाली क्यों न हो और उसके नेतृत्व के लिए उसका कितना ही सम्मानित और आदर क्यों न किया जाता हो, यह मानवीय दृष्टिकोण से निरर्थक है। उसी प्रकार, चाहे हम कितना भी उदार, प्रतिभाशाली और शिक्षित क्यों न हों, जब परमेश्वर के दृष्टिकोण से मानव दुनिया देखी जाए, तो जब तक हम परमप्रधान परमेश्वर से रिश्ता न रखें तब तक हम उनके लिए कुछ भी नहीं हैं। परमेश्वर ने हम पर, जो कीड़े के समान हैं दया की है,…

बपतिस्मा क्या है?

विवाह एक प्रेमी जोड़े के लिए जीवन की नई शुरुआत है। विवाह समारोह के दौरान वे अपने जीवन के बाकी समय में पति और पत्नी के रूप में सुख-दुख को बांटने की शपथ लेते हैं। उसी तरह, बपतिस्मा परमेश्वर की ओर जाने के लिए पहला कदम है, और यह एक विधि है जिसमें हम परमेश्वर के साथ वाचा बांधते हैं। बपतिस्मा के द्वारा परमेश्वर हमारे सभी पापों को क्षमा करते हैं, और हम अपने जीवन के पिछले पापमय मार्ग से फिरने और अपने जीवन के बाकी समय में सिर्फ परमेश्वर की सेवा करने के द्वारा परमेश्वर के लोगों के रूप में जीने की प्रतिज्ञा करते हैं। बपतिस्मा हमारे जीवन में एक ऐसा मोड़ होता है, जिसके द्वारा हमारे अतीत के…

फसह का पर्व स्वर्ग के द्वार को खोलने की चाबी है

आज दुनिया में बहुत से चर्च हैं जो कहते हैं कि उन्हें परमेश्वर पर विश्वास है। लेकिन सिर्फ चर्च ऑफ गॉड है जो परमेश्वर के पर्वों में से एक नई वाचा का फसह मनाता है जिसमें उद्धार की प्रतिज्ञा शामिल है। जैसे कि बाइबल कहती है, “मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्ट हो गई(हो 4:6),” बहुत से लोग बाइबल को सही तरह से नहीं समझते और फसह को तुच्छ समझते हैं कि उसे मनाने की जरूरत नहीं है; वे सोचते हैं कि यदि वे परमेश्वर पर सिर्फ विश्वास करें तो स्वर्ग का राज्य उन्हें दिया जाएगा। बाइबल के वचनों के द्वारा आइए हम फसह के अर्थ पर पुनर्विचार करें और झूठ में से सत्य को पहचानें। वे…

विपत्ति और फसह का पर्व

जब हम सुबह उठकर न्यूज चैनल देखते हैं, तब बहुत सारी विपत्तियों और दुर्घटनाओं की खबरें सुनते हैं। विभिन्न प्रकार की विपत्तियों में से सबसे बड़ी विपत्ति क्या है? परमेश्वर ने किस विपत्ति से हमें बचाने के लिए फसह को मानव जाति के लिए औषधि के रूप में निर्धारित किया है? चाहे संसार में घटित होने वाली विपत्तियां कितने ही लंबे समय तक क्यों न जारी रहें, लेकिन वे मनुष्य के जीवनकाल से भी अधिक समय तक नहीं घट सकतीं। लेकिन बाइबल में एक विपत्ति है जो युगानुयुग जारी रहती है; भले ही लोग उस विपत्ति की पीड़ा अत्यधिक होने के कारण मरने की लालसा करेंगे, लेकिन मृत्यु उनसे भागेगी। हमें नई वाचा का फसह देने के पीछे परमेश्वर की…

परमेश्वर का वचन और भोजन

भोजन खाए बिना, मनुष्य ठीक से काम नहीं कर सकते, न तो ठीक से सोच सकते हैं और न ही अपने उद्देश्य और योजनाओं को पूरा कर सकते हैं। आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। यदि हम आत्मिक भोजन न खाएं, तो हम उन आत्मिक कार्यों के अनुग्रहमय परिणाम नहीं प्राप्त कर सकते जिनकी हम आशा करते हैं। बाइबल हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि परमेश्वर का वचन हमारे लिए जीवन का भोजन है और उसमें हमारी आत्माओं को नया करने की शक्ति है। यीशु ने हमें सिखाया है कि, “नाशवान् भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है”(यूह 6:27)। यीशु ने चेतावनी दी कि हमें नाशवान् भोजन…

परमेश्वर एकमात्र समाधान है

जब कभी हम किसी समस्या का सामना करते हैं, तब हम उससे मदद मिलने की उम्मीद करते हैं जो हमें ऐसा दिखता है कि वह समस्या को सुलझा देगा, और हम उस पर निर्भर हो जाते हैं। पृथ्वी की वस्तुएं स्वर्ग की वास्तविक वस्तुओं की छाया है।(इब्र 8:5) फिर भी, जब हम कुछ करते हैं, तो हम अक्सर छाया का पालन करने की कोशिश करते हैं। छाया का पालन करना किसी काम का नहीं है। हमें वास्तविकता का पालन करना चाहिए। वह परमेश्वर हैं जो सुसमाचार के कार्य का नेतृत्व करते हैं और उसे पूरा करते हैं। इस पृथ्वी पर सब कुछ तभी हासिल किया जा सकता है जब परमेश्वर स्वर्ग में उसकी मंजूरी देते हैं। कोई भी अपनी बुद्धि,…