उपदेश
यह आपको परमेश्वर के वचनों पर जो आपकी आत्मा को पुनर्जीवित करते हैं, दिन-रात ध्यान करने में सहायता करने के लिए है।
फसह और विपत्तियों से पार होने का कारण
परमेश्वर ने शैतान को नष्ट करने और अपनी संतानों को अनंत जीवन देने के लिए फसह की स्थापना की। जो कोई भी सिय्योन में रहता है, वह फसह के महत्व को अच्छी तरह जानता है। अब, हमें और अधिक सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है कि जब हम फसह मनाते हैं तो विपत्तियां हमारे ऊपर से क्यों पार हो जाती हैं। फसह का सही अर्थ क्या है? हमें विपत्तियों से मुक्त करने के लिए फसह की शक्ति का स्रोत क्या है? आइए हम परमेश्वर के सामने विनम्र और शालीन स्वभाव के साथ, बाइबल के द्वारा इन मामलों का अध्ययन करें। फसह के मेमने के लहू के द्वारा विपत्तियों से बचना फसह लगभग 3,500 वर्ष पहले स्थापित किया गया परमेश्वर…
स्वतंत्रता की व्यवस्था, फसह
बाइबल की 66 पुस्तकें भविष्यद्वक्ताओं के व्यक्तिगत विचार या दर्शनशास्त्र के अभिलेख नहीं, लेकिन मानव जाति के उद्धार के लिए दी गई परमेश्वर की शिक्षाएं हैं। चूंकि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हुए उद्धार की अभिलाषा करते हैं, हमें इस बात पर पूरी तरह विश्वास करके परिश्रमपूर्वक बाइबल का अध्ययन करना चाहिए। बाइबल कहती है कि ऊपर की यरूशलेम अर्थात् हमारी माता ‘स्वतंत्र’ हैं और यह कि चूंकि मसीह ने हमें स्वतंत्र कर दिया है इसलिए हम अब और पाप के दास नहीं लेकिन स्वतंत्र हैं(गल 4:26; यूह 8:32-36)। हम स्वतंत्र पिता परमेश्वर और स्वतंत्र माता परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, इसलिए हम स्वतंत्र संतान हैं। आइए हम बाइबल में स्वतंत्रता का अर्थ खोजें और परमेश्वर के अनुग्रह के लिए…
परमेश्वर और हमारे बीच संबंध
परमेश्वर हमें “मेरी प्रजा”, “मेरी संतान” कहते हैं। इसका बड़ा महत्व है। मान लीजिए कि एक मछली है जो मछली की दुनिया में अन्य मछलियों पर एक अच्छा शासक बनने के लिए बुद्धिमान और उदार है। चाहे वह मछली कितनी भी प्रतिभाशाली क्यों न हो और उसके नेतृत्व के लिए उसका कितना ही सम्मानित और आदर क्यों न किया जाता हो, यह मानवीय दृष्टिकोण से निरर्थक है। उसी प्रकार, चाहे हम कितना भी उदार, प्रतिभाशाली और शिक्षित क्यों न हों, जब परमेश्वर के दृष्टिकोण से मानव दुनिया देखी जाए, तो जब तक हम परमप्रधान परमेश्वर से रिश्ता न रखें तब तक हम उनके लिए कुछ भी नहीं हैं। परमेश्वर ने हम पर, जो कीड़े के समान हैं दया की है,…
बपतिस्मा क्या है?
विवाह एक प्रेमी जोड़े के लिए जीवन की नई शुरुआत है। विवाह समारोह के दौरान वे अपने जीवन के बाकी समय में पति और पत्नी के रूप में सुख-दुख को बांटने की शपथ लेते हैं। उसी तरह, बपतिस्मा परमेश्वर की ओर जाने के लिए पहला कदम है, और यह एक विधि है जिसमें हम परमेश्वर के साथ वाचा बांधते हैं। बपतिस्मा के द्वारा परमेश्वर हमारे सभी पापों को क्षमा करते हैं, और हम अपने जीवन के पिछले पापमय मार्ग से फिरने और अपने जीवन के बाकी समय में सिर्फ परमेश्वर की सेवा करने के द्वारा परमेश्वर के लोगों के रूप में जीने की प्रतिज्ञा करते हैं। बपतिस्मा हमारे जीवन में एक ऐसा मोड़ होता है, जिसके द्वारा हमारे अतीत के…
फसह का पर्व स्वर्ग के द्वार को खोलने की चाबी है
आज दुनिया में बहुत से चर्च हैं जो कहते हैं कि उन्हें परमेश्वर पर विश्वास है। लेकिन सिर्फ चर्च ऑफ गॉड है जो परमेश्वर के पर्वों में से एक नई वाचा का फसह मनाता है जिसमें उद्धार की प्रतिज्ञा शामिल है। जैसे कि बाइबल कहती है, “मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्ट हो गई(हो 4:6),” बहुत से लोग बाइबल को सही तरह से नहीं समझते और फसह को तुच्छ समझते हैं कि उसे मनाने की जरूरत नहीं है; वे सोचते हैं कि यदि वे परमेश्वर पर सिर्फ विश्वास करें तो स्वर्ग का राज्य उन्हें दिया जाएगा। बाइबल के वचनों के द्वारा आइए हम फसह के अर्थ पर पुनर्विचार करें और झूठ में से सत्य को पहचानें। वे…
विपत्ति और फसह का पर्व
जब हम सुबह उठकर न्यूज चैनल देखते हैं, तब बहुत सारी विपत्तियों और दुर्घटनाओं की खबरें सुनते हैं। विभिन्न प्रकार की विपत्तियों में से सबसे बड़ी विपत्ति क्या है? परमेश्वर ने किस विपत्ति से हमें बचाने के लिए फसह को मानव जाति के लिए औषधि के रूप में निर्धारित किया है? चाहे संसार में घटित होने वाली विपत्तियां कितने ही लंबे समय तक क्यों न जारी रहें, लेकिन वे मनुष्य के जीवनकाल से भी अधिक समय तक नहीं घट सकतीं। लेकिन बाइबल में एक विपत्ति है जो युगानुयुग जारी रहती है; भले ही लोग उस विपत्ति की पीड़ा अत्यधिक होने के कारण मरने की लालसा करेंगे, लेकिन मृत्यु उनसे भागेगी। हमें नई वाचा का फसह देने के पीछे परमेश्वर की…
परमेश्वर का वचन और भोजन
भोजन खाए बिना, मनुष्य ठीक से काम नहीं कर सकते, न तो ठीक से सोच सकते हैं और न ही अपने उद्देश्य और योजनाओं को पूरा कर सकते हैं। आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। यदि हम आत्मिक भोजन न खाएं, तो हम उन आत्मिक कार्यों के अनुग्रहमय परिणाम नहीं प्राप्त कर सकते जिनकी हम आशा करते हैं। बाइबल हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि परमेश्वर का वचन हमारे लिए जीवन का भोजन है और उसमें हमारी आत्माओं को नया करने की शक्ति है। यीशु ने हमें सिखाया है कि, “नाशवान् भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है”(यूह 6:27)। यीशु ने चेतावनी दी कि हमें नाशवान् भोजन…
परमेश्वर एकमात्र समाधान है
जब कभी हम किसी समस्या का सामना करते हैं, तब हम उससे मदद मिलने की उम्मीद करते हैं जो हमें ऐसा दिखता है कि वह समस्या को सुलझा देगा, और हम उस पर निर्भर हो जाते हैं। पृथ्वी की वस्तुएं स्वर्ग की वास्तविक वस्तुओं की छाया है।(इब्र 8:5) फिर भी, जब हम कुछ करते हैं, तो हम अक्सर छाया का पालन करने की कोशिश करते हैं। छाया का पालन करना किसी काम का नहीं है। हमें वास्तविकता का पालन करना चाहिए। वह परमेश्वर हैं जो सुसमाचार के कार्य का नेतृत्व करते हैं और उसे पूरा करते हैं। इस पृथ्वी पर सब कुछ तभी हासिल किया जा सकता है जब परमेश्वर स्वर्ग में उसकी मंजूरी देते हैं। कोई भी अपनी बुद्धि,…
जो कुछ सारा तुझ से कहे, उसकी सुन
अब से 3,500 साल पहले जब परमेश्वर सीनै पर्वत पर उतरा, उसने बड़ी ऊंची आवाज़ में दस आज्ञाओं की घोषणा की, और इन्हें पत्थर की पटियाओं पर खोदा। परमेश्वर की सारी आज्ञाओं का संहिताबद्ध किए जाने से, पुराने नियम बाइबल जो आज हम देखते हैं, का आधार बन गया। और 2 हज़ार वर्ष पहले, इस धरती पर देहधारी होकर आए यीशु के कार्य और उसकी शिक्षाओं को अभिलिखित किए जाने से, बाइबल नए नियम का केन्द्रीय स्तम्भ बन गया। जैसे पतरस, यूहन्ना और याकूब भक्तिपूर्वक यीशु का पालन करते थे, और यीशु ने पर्वत पर बहुत से लोगों के सामने धर्मोपदेश दिया, उसने बीमारों को चंगा किया और अनेक आश्चर्यकर्म किए और फसह के पर्व पर ऐसा वादा करके नई…
पिता परमेश्वर, माता परमेश्वर
परमेश्वर ने सारे मानव को सुसमाचार सुनने और इसे महसूस करके उद्धार पाने का मौका दिया है। उस अनुग्रह के द्वारा ही, विश्व में सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य आश्चर्य रूप से सफल हो रहा है, और पूरे विश्व में हर क्षेत्रों से बहुतेरी आत्माएं पश्चात्ताप करते हुए परमेश्वर की गोद में वापस आ रही हैं। लोग जिन्होंने यह सुसमाचार सुना है, उनके लिए सब से ज़्यादा अचंभित करने वाला सत्य स्वर्गीय माता है। यूरोप, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, ओशिनिया, एशिया, अफ्रीका, आदि किसी भी देश में स्वर्गीय माता के सत्य के सामने सुसमाचार सुनाने के लिए द्वार खुल जाता है। इससे हमें पता चलता है कि देश-देश के लोग स्वर्गीय माता के उद्धार के लिए बहुत तरसते रहे…
अन्त तक धीरज रखो
हम इस्राएलियों के जंगल में 40 वर्ष के इतिहास को याद करें। सभी इस्राएलियों ने कनान पहुंचने के लिए जंगल में लगातार कठोर यात्रा की, फिर भी बहुत से लोगों ने बीच में अपनी यात्रा छोड़ दी। कुछ लोगों ने 20 या 30 वर्ष तक चलने के बाद यात्रा छोड़ी, और कुछ लोगों ने कनान पहुंचने से पहले यात्रा छोड़ी, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के ग्रहण योग्य जीवन नहीं जिया। उनके समान हम भी इस समय मसीही यात्रा कर रहे हैं। मैं आशा करता हूं कि इस यात्रा में बिना किसी को छोड़े हम सब स्वर्ग के कनान तक सब सुरक्षित रूप से पहुंचें। अब विश्वासी जीवन जीने के लिए अनेक परिस्थितियां पहले से बेहतर हो गई हैं। लेकिन मुझे लगता…
प्रभु में आनन्दित रहो
जब हम परमेश्वर की बनाई रचनाओं को ध्यान से देखें, तब हमें एहसास होता है कि परमेश्वर हमें कितने ज़्यादा अनुग्रह के वरदान दे रहा है। ताज़ी हवा, स्वच्छ पानी, हरे पेड़–पौधे, हमारे पास प्यारे लोग, मौसम या ऋतु में आते बदलाव से आनन्ददायक अनुभूति, आदि बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिनके लिए हम धन्यवादित व आनन्दित हो सकते हैं। इसलिए बाइबल अक्सर कहती है कि धन्यवादित व आनन्दित होना सद्गुण है जो मसीहियों को अपनाना चाहिए। पश्चिमी–पूर्वी दोनों देशों में, पुराने समय से ऐसी प्रथा चलती थी कि राजमहल या किले पर, जहां राजा रहता था, विशेष झण्डा लगा होता था। यह इस बात का चिन्ह था कि राजा उसमें है। इस तरह से मसीहियों का हमेशा आनन्दित होना…
पवित्र नगर यरूशलेम
बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, यरूशलेम की महिमा पूरे विश्व में बहुत तेज रफ्तार से प्रसारित होती जा रही है। यह समाचार जारी हो रहा है कि विश्व के जगह जगह से सिय्योन की सन्तान यरूशलेम की ओर आ रही हैं। जब हम ऐसे चिह्न और लक्षण को देखते हैं, तो हमें लगता है कि यरूशलेम की महिमा सामरिया और पृथ्वी के छोर तक विश्व में सारी जातियों को प्रसारित होने का दिन निकट है, जैसे परमेश्वर ने भविष्यवाणी की है। आइए हम यरूशलेम की वास्तविकता के बारे में जिसकी महिमा पूरे विश्व में प्रसारित होगी, और आशीष के बारे में जो यरूशलेम की महिमा में सम्मिलित होने वाले पाएंगे, बाइबल के वचन को जांचें। पवित्र नगरी यरूशलेम मसीह…
यरूशलेम से प्रेम रखनेवाले हे सब लोगो
एक एक वर्ष करके जैसे जैसे विश्वास के जीवन का वक्त गुज़र रहा है, वैसे वैसे पिता और माता के अनुग्रह के द्वारा सुन्दर स्वर्गदूतों की छवि में बदल जाने का क्षण निकट आ रहा है। इस समय, सिय्योन की सन्तान को, जो प्रतिज्ञा की सन्तान के रूप में बुलाई गई है, यरूशलेम माता के प्रति, जो बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, सुसमाचार के कार्य का नेतृत्व कर रही है, सही दृष्टिकोण रखना चाहिए। सिर्फ माता का बाह्य स्वरूप नहीं, बल्कि हमें माता का, जो हमारे लिए खुद को बलिदान कर रही है, अंतर्स्वरूप भी देखना चाहिए। तब हम ऐसा विश्वास रख सकेंगे जो परमेश्वर के उत्तराधिकारी, उद्धार पाने वाले के योग्य है। आइए हम बाइबल की भविष्यवाणी के द्वारा…
उदार और दयालु बनो
उदार होने का मतलब है, समुद्र जैसे बड़े मन से दूसरों को समझना और उनकी भावनाओं का आदर करना, जैसे माता की शिक्षा में लिखा है। बाइबल में हर कहीं उदार होने के बारे में अनेक शिक्षाएं लिखी हैं, क्योंकि पूरे विश्व में स्वर्गीय माता की महिमा को प्रकट करने के लिए लोग जो बुलाए गए हैं, उन्हें जो सद्गुणों में से अपनाना चाहिए, वह उदारता का सदगुण है। जब से हम सिय्योन की सन्तान हैं, हमें अपने सारे मन, प्राण और बुद्धि से परमेश्वर का आदर करना चाहिए। परमेश्वर हमसे चाहता है कि जब हम इसे करें, तब इसके साथ–साथ अवश्य ही उदारता का गुण रखें। परमेश्वर की इच्छा के अनुसार, हम अभी तक, सिर्फ आगे की ओर देखते…
परमेश्वर का बीज
बाइबल में लिखा है कि परमेश्वर अन्तिम समय में उद्धार पाने वालों को अपना वंश(बीज) मानता है, और परमेश्वर तब अपने वंश(बीज) को देखेगा जब वह अपने प्राण की दोषबलि चढ़ाएगा। प्रकृति की समस्त वस्तुओं में बीज एक अद्भुत विशेषता रखता है। एक विशेषता यह है कि जब बीज जीवन लेकर उगता है, तब वह मातृ पौधे का रूप ले लेता है, और दूसरी विशेषता यह है कि बीज अवश्य ही फल लाता है। कोई भी बीज हो, बीज में अंकुर निकलता है और बीज अपना मूल रूप लेकर बढ़ता है, और आखिर में वह अवश्य ही बहुत सारे फल पैदा करता है। परमेश्वर ने कहा है कि वह हमें अपना वंश(बीज) मानता है। इस वचन में गहरा अर्थ निहित…
अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे
नई वाचा का सुसमाचार पूरे विश्व में फैलाया जा रहा है। आत्मिक रूप से अंधे आंखें खोलते हैं और बहिरे सुनते हैं, और घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहे लोग जिलाए जाते हैं। परमेश्वर के अपने लहू से स्थापित की गई नई वाचा की सामर्थ्य सचमुच, आश्चर्यजनक एवं अद्भुत है। जो कोई नई वाचा पर विश्वास करते और मनाते हैं, परमेश्वर ने उन लोगों से ऐसा वादा किया है कि वे बिना शर्त के पापों की क्षमा और अनन्त जीवन पाएंगे, और परमेश्वर उनका परमेश्वर ठहरेगा आर वे उसकी प्रजा ठहरेंगे।(यिर्म 31:31–34 संदर्भ) हम स्वर्ग में पाप करने के कारण इस धरती पर निकाल दिए गए हैं, और हम कैदी हैं जिन्होंने मृत्युदंड की सजा पाई…
लोग जो परमेश्वर के पक्ष में हैं और लोग जो अपने पक्ष में हैं
विश्वास की इस यात्रा में जिसमें अनन्त स्वर्ग की आशा करते हुए आगे कदम बढ़ाते हैं, हम किस तरह के लोग हैं? क्या हम परमेश्वर के हैं? या क्या हम खुद के हैं? यदि हम पिछले दिनों के बारे में सोचें, तो हमें अवश्य ही लगेगा कि परमेश्वर के होने के बजाय, हम बहुत बार खुद के बनते थे। मन में तो बार–बार हम इच्छा बनाते रहते हैं कि ‘मैं परमेश्वर का होऊंगा!’, फिर भी ऐसा जीवन जीने से हम बार–बार चूक जाते हैं। इसलिए इस समय, आइए हम परमेश्वर के वचन के द्वारा स्पष्ट रूप से देखें कि क्या हम अब परमेश्वर के होते हुए जी रहे हैं, या फिर खुद के होते हुए जी रहे हैं। जो अपने…
उद्देश्यपूर्ण जीवन
पूरी दिनचर्या खत्म होने के बाद कभी रात में, व एक वर्ष खत्म होने के बाद कभी नववर्ष में, लोग अपने बीते समय को याद करते हैं। हर एक को बराबर समय दिया जाता है। लेकिन कोई अपने समय को ईमानदारी से गुजारता है तो कोई समय बेकार गंवाता है। ऐसा फर्क इस बात से पड़ता है कि उसके पास उद्देश्य है या नहीं। जब हम जीवन में कुछ उद्देश्य बनाकर उसे प्राप्त करने की पूरी कोशिश करें, तब हमें सफल परिणाम मिल सकता है। इसलिए एक व्यक्ति या कोई समुदाय काम करने से पहले उद्देश्य को तय करते हैं। हमारे विश्वासी जीवन में भी एक ही होता है। हर एक को दिया गया बराबर समय अब बीतता जा रहा…
अभिमानी न हो
अब, पूरे संसार से अलग हुए परिवार बादल की तरह सिय्योन में उमड़ आ रहे हैं। तो हमारा मन पहले से और ज्यादा विकसित होना चाहिए। जितना ज्यादा सदस्य सत्य में आते हैं, उतना ही ज्यादा अगुवे सिय्योन में मांगे जाते हैं। हम जो परमेश्वर से पहले बुलाए जाकर सुसमाचार के पवित्र कार्य में सहयोगी हो रहे हैं, जब नम्र मन से परमेश्वर का आदर करेंगे और सदस्यों की सेवा करेंगे, तब सुसमाचार का कार्य बहुत ही जल्दी पूरा होगा। हमें सिर्फ वचन सुनना ही नहीं, परन्तु परमेश्वर की सारी शिक्षाओं को जीवन में लागू करना चाहिए। परमेश्वर उन नकली मसीहियों से बिल्कुल खुश नहीं होता जो चर्च के अन्दर मसीही बनते हैं, लेकिन चर्च के बाहर परमेश्वर के मार्ग…