यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

क्यों हम प्रार्थना करते हैं?

हमारे प्रार्थना करने का कारण क्या है? कुछ लोग बिना उद्देश्य के अनिश्चित प्रार्थना करते हैं। लेकिन, यदि हम प्रार्थना करने के कारण और उद्देश्य को जानते हैं, तो हम और अधिक सच्चे दिल से प्रार्थना कर सकते हैं। आइए हम देखें कि हमें क्यों प्रार्थना करनी चाहिए। 1) परमेश्वर का धन्यवाद करने के लिए हमारे प्रतिदिन के जीवन में, हम बहुत बार परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम का अनुभव करते हैं और उनका एहसास करते हैं। हम उन बहुत सी आशीषों के लिए जो परमेश्वर हम पर बरसाते हैं, धन्यवाद करने के लिए प्रार्थना करते हैं। हम धन्यवाद की प्रार्थना इस प्रकार करते हैं; हम भोजन के समय परमेश्वर से दिन भर की रोटी के लिए धन्यवाद की प्रार्थना…

प्रार्थना क्या है?

प्रार्थना परमेश्वर से आशीष मांगने की एक विधि है। प्रार्थना में हम सिर्फ आशीष नहीं, बल्कि जब हमारे सामने कठिनाइयां आती हैं, सहायता भी मांगते हैं। दूसरों से सहायता लिए बिना, हमारे लिए इस संसार में जीवन जीना मुश्किल है। क्योंकि हमारी क्षमता सीमित है। उसी तरह से हम परमेश्वर से सहायता लिए बिना नहीं जी सकते। इसलिए हमें उन परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए जो हमारी कमजोरी के बारे में जानते हैं और हमारी सहायता करते हैं। मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा, ढूंढ़ो तो तुम पाओगे, खटखटाओ तो तुम्हारे लिए खोला जाएगा। क्योंकि प्रत्येक जो मांगता है उसे मिलता है, और जो ढूंढ़ता है वह पाता है, और जो खटखटाता है उसके लिए खोला जाएगा। मत 7:7–8 इन वचनों…

क्यों हमें परमेश्वर के वचन का अध्ययन करना चाहिए

क्यों हमें परमेश्वर के वचन का अध्ययन करना चाहिए? आइए हम बाइबल के द्वारा इसके कारणों को जानें। 1. हमारी आत्मा के जीवन के लिए परमेश्वर का वचन आत्मिक भोजन है। यीशु ने कहा कि हम परमेश्वर के वचन से जीवित रहेंगे। यीशु ने उत्तर दिया : “लिखा है, ‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा।’ ” मत 4:4 क्या लोग बिना खाए जी सकते हैं? नहीं। यदि हम भोजन न खाएं, तो हम समय बीतने पर कमजोर हो जाएंगे और आखिरकार अपना जीवन खो देंगे। हमारी आत्माओं के साथ भी ऐसा ही है। यदि हम आत्मिक भोजन, परमेश्वर का वचन न खाएं, तो हमारे पास आत्मिक…

क्यों सदस्यों को एक दूसरे की सेवा करनी चाहिए

परमेश्वर ने हमसे “सेवा करनेवाले” बनने को कहा है। हम, स्वर्गीय संतानों को परमेश्वर की शिक्षा को अभ्यास में लाकर परमेश्वर को प्रसन्न करना चाहिए। आइए हम, बाइबल के द्वारा इसका कारण देखें कि हमें एक दूसरे की सेवा क्यों करनी चाहिए। पहला, यह इसलिए क्योंकि मसीह ने स्वयं सेवा करने का नमूना दिखाया है। “... परन्तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने; और जो तुम में प्रधान होना चाहे, वह तुम्हारा दास बने; जैसे कि मनुष्य का पुत्र; वह इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे।” मत 20:26-28 पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर सबसे ऊंचे और…

हमें एक दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

परमेश्वर तब प्रसन्न होते हैं जब उनकी संतानें एकजुट होती हैं(भज 133:1; फिल 2:1-2)। हालांकि, यदि हम एक दूसरे के साथ असभ्य व्यवहार करते और एक दूसरे के प्रति विचारशील नहीं रहते, तो एक बनना मुश्किल होगा। इसलिए, हमें प्रेम के प्रति विनम्र और विचारशील होकर एकता को पूरा करना चाहिए जिससे परमेश्वर प्रसन्न होते हैं। फिर, आइए हम देखें कि हमें एक दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। पहला, हमें शिष्टाचार के साथ एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए। मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं कि एक दूसरे से प्रेम रखो; जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। यूह 13:34 परमेश्वर ने कहा कि हमें एक दूसरे…

क्यों हमें धीरज रखना चाहिए

हमारे विश्वास के जीवन में, क्यों हमें धीरज रखना चाहिए? आइए हम बाइबल के द्वारा कारणों को जानें। 1. उद्धार पाने के लिए “भाई, भाई को और पिता पुत्र को, घात के लिए सौंपेंगे, और बच्चे माता-पिता के विरोध में उठकर उन्हें मरवा डालेंगे। मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे, पर जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।” मत 10:21-22 बाइबल हमें सिखाती है कि जो अंत तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा। इसलिए हमें उद्धार पाने के लिए अंत तक धीरज रखना चाहिए। हमारा विश्वास कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि हम अंत तक धीरज रखने में नाकाम होकर सत्य का मार्ग छोड़ दें, तो हमारा विश्वास व्यर्थ हो…

मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियां दूंगा

यीशु ने कैसरिया फिलिप्पी के प्रदेश में आकर अपने चेलों से पूछा, "लोग मुझे क्या कहते हैं?" "कुछ तो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला कहते हैं, और कुछ एलिय्याह!" "कुछ यिर्मयाह या भविष्यद्वक्‍ताओं में से कोई एक कहते हैं!” चेलों के जवाब पर, यीशु ने उन्हें फिर से पूछा, "परन्तु तुम्हारे बारे में क्या? तुम मुझे क्या कहते हो?” पतरस आत्मविश्वास से भरी आवाज में जवाब देता है। "आप जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह हैं।" "पतरस, तू धन्य है; क्योंकि मेरे पिता ने जो स्वर्ग में हैं, यह बात तुझ पर प्रगट की है।" यीशु ने पतरस को विशेष अनुग्रह दिया जिसने उन्हें परमेश्वर के रूप में पहचाना। "तू पतरस(पत्थर) है। मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा, और अधोलोक के फाटक…

उनसे कहना, “प्रभु को इस का प्रयोजन है”

जब वे यरूशलेम के निकट पहुंचे, तो यीशु ने गांव में दो चेलों को भेजा। “सामने के गांव में जाओ, और उस में पहुंचते ही एक गदही का बच्चा, जिस पर कभी कोई नहीं चढ़ा, बंधा हुआ तुम्हें मिलेगा। उसे खोल लाओ। यदि तुम से कोई पूछे, ‘यह क्यों करते हो?’ तो कहना, ‘प्रभु को इस का प्रयोजन है,’ और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा।” जब चेले गांव में गए, तो उन्होंने गदही के बच्चे को बाहर द्वार के पास चौक में बंधा हुआ पाया जैसा यीशु ने कहा था। जब चेलों ने उसे ले जाने के लिए रस्सी को खोला, उनमें से जो वहां खड़े हैं, एक आदमी ने पूछा, “तुम उसे क्यों खोल रहे हो?” “प्रभु ने…

परमेश्वर ने सारी छावनी को हमारे वश में कर दिया है

गिदोन और उसका सेवक फूरा दुश्मन की छावनी में छिपकर मिद्यानी सैनिकों की बातचीत सुन रहे हैं। यह परमेश्वर के वचन के कारण था जो उन्होंने मिद्यानी छावनी के विरुद्ध लड़ने के लिए 300 योद्धाओं को चुनने के बाद कहा था। “उठ, दुश्मन की छावनी पर चढ़ाई कर; क्योंकि मैं उसे तेरे हाथ कर देता हूं। परन्तु यदि तू चढ़ाई करते डरता हो, तो अपने सेवक फूरा को संग लेकर मिद्यानी छावनी के पास जाकर सुन कि वे क्या कह रहे हैं। उसके बाद तुझे उस छावनी पर चढ़ाई करने का साहस होगा।” उस रात, वे उतर गए और देखा कि मिद्यानी, अमालेकी और सब पूर्वी लोग तो टिड्डियों के समान बहुत से तराई में फैले पड़े थे। और उनके…

हमें किस प्रकार के शब्द बोलने चाहिए? (2)

हम यह देखना जारी रखेंगे कि परमेश्वर क्या चाहते हैं कि हम किस प्रकार के शब्दों का उपयोग करें। 1. धन्यवाद के शब्द जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार और किसी प्रकार के अशुद्ध काम या लोभ की चर्चा तक न हो; और न निर्लज्जता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की; क्योंकि ये बातें शोभा नहीं देतीं, वरन् धन्यवाद ही सुना जाए। इफ 5:3-4 बाइबल हमें सिखाती है कि हमें धन्यवाद के शब्द बोलने चाहिए। परमेश्वर स्वयं हमारी आत्माओं के लिए इस पृथ्वी पर आए जिनके लिए पापों के कारण मरना नियुक्त किया गया था, और उन्होंने हमारे सभी पापों को उठाकर हमें बचाया। परमेश्वर आनंद से भरे स्वर्ग में हमारी अगुवाई कर रहे…

हमें किस प्रकार के शब्द बोलने चाहिए? (1)

शब्द हमारे व्यक्तित्व को प्रतिबिंबित करते हैं। यह इसलिए क्योंकि शब्दों में हमारे विचार और भावनाएं शामिल होते हैं। इसलिए, परमेश्वर की संतानों के रूप में, जिन्होंने उद्धार की प्रतिज्ञा प्राप्त की हैं, हमें अनुग्रहपूर्ण शब्दों और धन्यवाद भरे शब्दों के साथ परमेश्वर को महिमा देनी चाहिए। अब से, हम बाइबल के द्वारा देखेंगे कि परमेश्वर क्या चाहते हैं कि हम किस प्रकार के शब्दों का उपयोग करें। 1. हमें बैरभाव को दूर फेंकना चाहिए और अच्छे शब्द बोलने चाहिए कोई गन्दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही निकले जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उससे सुननेवालों पर अनुग्रह हो। परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के…

परमेश्वर के वचन संपूर्ण हैं

परमेश्वर के वचन संपूर्ण हैं, और इन्हें स्वीकार न करने का कोई कारण नहीं है। परमेश्‍वर के वचन को संपूर्ण रूप से मानना ही आशीष और उद्धार प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग है, क्योंकि परमेश्वर केवल उन लोगों पर ही आशीष उंडेलते हैं जो उनके वचनों का संपूर्ण रूप से पालन करते हैं। 1. नूह का जहाज उन दिनों में जब बारिश नहीं होती थी, परमेश्वर ने नूह को एक बड़ा जहाज बनाने की आज्ञा दी। जहाज का आकार जिसे परमेश्वर ने बनाने की आज्ञा दी, ऐसा था कि उसकी लंबाई 450 फीट(137 मीटर), उसकी चौड़ाई 75 फीट(23 मीटर), उसकी ऊंचाई 45 फीट(14 मीटर) थी। चूंकि उन दिनों में जहाज बनाने के लिए आज के जैसी तकनीक नहीं थी, इसलिए…

हमारे शब्दों के द्वारा आशीष और शाप

बाइबल उन लोगों के इतिहास को दर्ज करती है जिन्होंने अपने शब्दों के द्वारा आशीष प्राप्त की और जिन्होंने अपने शब्दों के द्वारा शाप पाया। उनके इतिहास के द्वारा, आइए हम सोचें कि हमें किस प्रकार के शब्द कहने चाहिए। 1. पतरस को स्वर्ग के राज्य की कुंजियां प्राप्त हुईं ... “परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?” शमौन पतरस ने उत्तर दिया, “तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “हे शमौन, योना के पुत्र, तू धन्य है... मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियां दूंगा : और जो कुछ तू पृथ्वी पर बांधेगा, वह स्वर्ग में बंधेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा।” मत 16:13-19 जब यीशु ने पूछा, "तुम…

शब्दों का महत्व

एक कहावत है, "एक शब्द के द्वारा ऋण रद्द किया जाता है।" इसका मतलब है कि शब्द का प्रभाव बहुत महान है। परमेश्वर ने भी बाइबल के द्वारा हमें शब्दों का महत्व सिखाया है। आइए हम, बाइबल के द्वारा शब्दों का महत्व देखें। 1. शब्द एक दर्पण की तरह है जो हमारे अंदर को उजागर करता है "यदि पेड़ को अच्छा कहो, तो उसके फल को भी अच्छा कहो, या पेड़ को निकम्मा कहो, तो उसके फल को भी निकम्मा कहो; क्योंकि पेड़ अपने फल ही से पहचाना जाता है। हे सांप के बच्चो, तुम बुरे होकर कैसे अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है। भला मनुष्य मन के भले भण्डार…

विश्वास के पूर्वज जो परीक्षा पर विजयी हुए

शैतान ने सृष्टि के समय से ही सभी प्रकार की दुष्ट योजनाओं से परमेश्वर की संतानों को लुभाया। हमें अनन्त स्वर्ग के राज्य की ओर बढ़ने के लिए शैतान के सभी प्रलोभनों पर विजयी होना चाहिए। विश्वास के पूर्वजों के कई अभिलेख हैं, जो शैतान के प्रलोभन पर विजयी होकर आशीषित किए गए थे। आइए हम उनके कामों के द्वारा विश्वास के रवैए के बारे में अध्ययन करें जो हमारे पास प्रलोभन पर जय पाने के लिए होना चाहिए। 1. यीशु चालीस दिन और चालीस रात भूखे रहने के बाद, यीशु को शैतान के द्वारा परखा गया। यह दिखाता है कि जब हम यीशु पर विश्वास करेंगे और उनका पालन करेंगे, तब हम भी ऐसे ढंग से परखे जाएंगे। पहले…

शैतान की परीक्षा और विजय

शैतान आत्मिक दुनिया में हमारे विश्वास को कमजोर करता है, और भौतिक चीजें, यश, माता-पिता, सन्तान, झगड़ा, घृणा, शक्ति, पैसा, प्रेम, ईर्ष्या, डाह, प्रतिष्ठा इत्यादि जैसी सांसारिक बातों के द्वारा, हमें नाश और पतन की ओर ले जाता है, ताकि हम पीछे हटें और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न कर सकें। हमें शैतान की ऐसी परीक्षाओं पर विजय पानी चाहिए। 1. शैतान कैसे हमें परीक्षा देता है? जब हम गरीब होते हैं, शैतान भौतिक चीजों के द्वारा परीक्षा करता है। वह हमें परमेश्वर के प्रयोजन पर संदेह कराने के द्वारा परीक्षा करता है। वह हमें इस संसार की महिमा और धन-सम्पत्ति को दिखाने के द्वारा और हमारे मन में परमेश्वर के प्रति विश्वास पैदा करने के बजाय सांसारिक चीजों…

क्यों हमें सिय्योन में इकट्ठा होने के लिए प्रयास करना चाहिए

जैसे माता-पिता तब खुश होते हैं जब उनकी संतान इकट्ठी होती हैं, ठीक वैसे ही परमेश्वर चाहते हैं कि उनके लोग इकट्ठे हों, और वह उन्हें आशीष देते हैं जब वे इकट्ठे होते हैं। "फिर मैं तुम से कहता हूं, यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिए एक मन होकर उसे मांगें, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्वर्ग में है, उनके लिए हो जाएगी। क्योंकि जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठा होते हैं, वहां मैं उनके बीच में होता हूं।" मत 18:19-20 परमेश्वर का वचन, "जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठा होते हैं, वहां मैं उनके बीच में होता हूं,” इसका मतलब यह नहीं है कि जब हम…

प्रार्थना के विषय क्या होने चाहिए?

परमेश्वर की सहायता के बिना हम कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। परमेश्‍वर इंतजार करते हैं कि हम उनसे मदद मांगें(मत 7:7-8), और अदृश्य रूप से हमारी प्रार्थनाओं पर कान लगाते हैं। इसलिए, हमें निरंतर प्रार्थना में लगे रहने का प्रयास करना चाहिए(1थिस 5:17)। प्रार्थना के विषय क्या होने चाहिए? आप पहले परमेश्वर के राज्य और उनकी धार्मिकता की खोज करें(मत 6:25-34)। सम्पूर्ण बुद्धि के लिए प्रार्थना करें(याक 1:5)। प्रार्थना करें कि आप परीक्षा में न पड़ें।(लूक 22:40)। प्रार्थना करें कि आप पर पवित्र आत्मा उंडेल दें(लूक 11:13)। प्रार्थना करें कि वचन सुनाने का द्वार खोल दें(कुल 4:2-6)। प्रार्थना करें कि आप साहस से सुसमाचार के रहस्य को प्रकट कर सकें(इफ 6:18-19)। प्रार्थना करें कि आप पूर्ण विश्वास के साथ…

हमें कब प्रार्थना करनी चाहिए?

बाइबल में लिखा है कि विश्वास के पुर्वजों ने प्रार्थना के द्वारा कठिनाइयों पर जय पाने के बाद आशीष प्राप्त की। यीशु, जो उद्धारकर्ता के रूप में पृथ्वी पर आए, उन्होंने भी प्रार्थना के द्वारा सुसमाचार का कार्य किया। ईसाइयों के जीवन में प्रार्थना आवश्यक है; यह परमेश्वर और हमारे बीच की एक कड़ी है। यदि हम अपनी इच्छाएं और आशाएं परमेश्वर को बताना चाहते हैं, तो हमें प्रार्थना करनी चाहिए। तब, हमें परमेश्वर से कब प्रार्थना करनी चाहिए? 1) हमें लगातार प्रार्थना में बने रहना चाहिए हमें, जो कुछ भी करते हैं उसकी शुरुआत, प्रार्थना से करनी चाहिए, और उसे प्रार्थना से आगे बढ़ाना चाहिए और उसे प्रार्थना से समाप्त करना चाहिए, ताकि हम इस वचन को, “निरन्तर प्रार्थना…

परमेश्वर के लिए मंदिर का निर्माण करो

दाऊद ने संगतराश को पत्थर गढ़ने की आज्ञा दी, और उसने एक लाख किक्कार सोना, और दस लाख किक्कार चांदी, और पीतल, लोहा और देवदार को बहुत तैयार किया। यह मंदिर के निर्माण के लिए है जो सब देशों में परमेश्वर की महिमा और कीर्ति प्रकट होगा। सबकुछ तैयार करने के बाद, दाऊद ने सुलैमान को बुलाकर कहा, “हे मेरे पुत्र, मेरी हार्दिक इच्छा तो थी कि अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाऊं, परन्तु यहोवा ने कहा, ‘तेरा पुत्र सुलैमान ही मेरे नाम का भवन बनाएगा,’ इसलिए हे पुत्र, परमेश्वर के वचन के अनुसार उनका भवन बनाना। यदि तू परमेश्वर की सब विधियों और नियमों पर चलने की चौकसी करेगा तब तू कृतार्थ होगा। मत डर और…